उत्तराखंड की 24 बिजली परियोजनाओं पर लगी रोक के मामले में केंद्र के जवाब पर नाखुशी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार कुंभकरण की तरह व्यवहार कर रही है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि वह उत्तराखंड में अलकनंदा और भगीरथी नदी बेसिन की परियोजनाओं से तब तक रोक नहीं हटाएगी जब तक सरकार इन 24 में से हरेक परियोजना की वजह से पर्यावरण और पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट नहीं देगी।
केंद्र ने गंगा के पुनरोद्धार की योजना के साथ पनबिजली परियोजनाओं की संभावना संबंधी हलफनामा दाखिल किया है। सर्वोच्च अदालत ने रिपोर्ट से इतर हलफनामा दाखिल किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए केंद्र की असुर कुंभकरण से तुलना करते हुए पूछा कि आखिर सरकार कब जागेगी।
'सो रही है सरकार'
जस्टिस दीपक मिश्रा व जस्टिस रोहिंगटन एफ नरीमन की पीठ ने कहा कि इन परियोजनाओं पर कई बार ताकीद कराए जाने के बावजूद सरकार सो रही है। वह कुंभकरण की तरह व्यवहार कर रही है।
13 सदस्यीय समिति की रिपोर्ट अदालत के समक्ष होनी चाहिए थी। लेकिन पिछली सुनवाई में कई बार कहे जाने के बावजूद रिपोर्ट नहीं पेश की गई।
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने जब अदालत से समय मांगा, तब पीठ ने पूछा कि आपका उद्देश्य क्या है। आखिर क्यों इतने समय के बावजूद आपने अब तक रिपोर्ट नहीं पेश की।
हम इन परियोजनाओं पर लगी रोक तब तक नहीं हटाएंगे जब तक रिपोर्ट नहीं पेश की जाएगी। याद रहे कि 13 अगस्त, 2013 के आदेश में सर्वोच्च अदालत ने उत्तराखंड में गत वर्ष आई आपदा के मद्देनजर इन परियोजनाओं को स्थापित किए जाने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी।
पांच नवंबर को होगी अगली सुनवाई
पीठ इस वजह से भी खासकर खफा थी कि इस साल 12 अगस्त को एक और आदेश अदालत ने मंत्रालय को जारी किया। लेकिन स्पष्ट रिपोर्ट नहीं दाखिल की गई। शीर्षस्थ अदालत ने साथ ही अलकनंदा और भगीरथी नदी बेसिन पर बने बैराज के डिजाइन के विवादास्पद होने का भी जिक्र किया।
पीठ ने कहा कि विभिन्न पक्षकार, जैसे नेशनल थर्मल पावर कार्पोरेशन (एनटीपीसी), नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कार्पोरेशन (एनएचपीसी) और टिहरी हाइड्रो विकास निगम (टीएचडीसी) व एनजीओ के प्रतिनिधि 15 अक्टूबर को इस मसले पर मंत्रालय के साथ एक बैठक करें।
पीएसयू की ओर से दो सदस्य, राज्य सरकार के प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ता भरत झुनझुनवाला भी इस बैठक में शामिल होंगे। वे आईआईटी समूह के अध्ययन के आधार पर गंगा बेसिन पर बने बैराज की डिजाइन पर रिपोर्ट देंगे। इसे 13 सदस्यीय समिति के समक्ष 29 अक्टूबर को रखी जाएगी और अदालत इस मसले पर 5 नवंबर को अगली सुनवाई करेगी।