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केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

Fri, 24 Jan 2014 08:58 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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दिल्ली के मुख्यमंत्रीपद पर होने के बावजूद विरोध प्रदर्शन करने वाले अरविंद केजरीवाल की भूमिका शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के परीक्षण के दायरे में आ गई।
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सर्वोच्च अदालत ने धारा-144 लागू होने के बावजूद राजधानी के बीचो-बीच केजरी समर्थकों के गैरकानूनी जमावड़े को अनुमति देने और कदम न उठाने को लेकर दिल्ली पुलिस को आड़े हाथों लिया है।

साथ ही केंद्र और दिल्ली सरकार को भी नोटिस जारी कर छह हफ्ते में जवाब तलब किया है। जस्टिस आरएम लोढा और जस्टिस शिव कीर्ति सिंह की पीठ ने निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद लोगों को रेल भवन के बाहर एकत्र होने की छूट देने को लेकर दिल्ली पुलिस के लचर रवैये की कड़ी आलोचना की।
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कैसे इकट्ठे हुए प्रदर्शनकारी
याद रहे कि धारा-144 लागू होने पर पांच या इससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर पाबंदी होती है। पीठ ने पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी से सवाल किया कि धारा-144 लागू होने संबंधी निषेधाज्ञा के बावजूद प्रदर्शनकारी कैसे एकत्र हुये।

आपने यह सब क्यों होने दिया, जबकि पहले से ही वहां भीड़ जुटी थी। पीठ ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि पुलिस ने इन सभी को वहां क्यों एकत्र होने दिया। जबकि इससे निषेधाज्ञा का उल्लंघन होता था।

हम जानना चाहते हैं कि क्या पुलिस ने कार्रवाई की थी। पांच व्यक्तियों के एकत्र होने की अनुमति देने के बाद पांच सौ और फिर हजारों की भीड़ हो गयी थी।

सर्वोच्च अदालत ने कहा कि हमारे पास मसला यह है कि संवैधानिक प्रावधानों का सम्मान हो। पीठ ने पुलिस आयुक्त को 31 जनवरी तक यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि केजरीवाल के धरना स्थल पर गैरकानूनी तरीके से लोगों को एकत्र होने की इजाजत क्यों दी गयी।

याद रहे कि पीठ अधिवक्ता एमएल शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा, हम दो सवालों पर जानकारी चाहते हैं।

पहला तो यह कि धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद पुलिस ने पांच और उससे अधिक लोगों को गैर कानूनी तरीके से एकत्र क्यों होने दिया।

दूसरा यह कि क्या कानून लागू करने वाली एजेंसी और पुलिस ने उचित तरीके और तत्परता से गैरकानूनी तरीके के जमावड़े को तितर-बितर करने के लिये उन्हें दंड प्रक्रि या संहिता की धारा 129(1) के तहत सूचित किया कि यदि वे नहीं जायेंगे तो उन्हें हटाने के लिये बल प्रयोग किया जाएगा।

पीठ ने कहा कि ने कहा कि संविधान सर्वोच्च है और प्रत्येक संस्था संविधान की ही देन है। इतने अहम पद पर आसीन प्रत्येक व्यक्ति संविधान से शासित होता है। हमारा सरोकार सिर्फ संवैधानिक मुद्दों से है।
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याद रहे कि केजरी के नेतृत्व में आप पार्टी उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही थी जिन्होंने दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती के निर्देशों पर नशीली दवाओं और वेश्यावृत्ति का कथित रूप से धंधा करने वालों के खिलाफ छापा मारने से इंकार कर दिया था।   
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