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खापों को पक्ष रखने का आमंत्रण दिया सुप्रीम कोर्ट ने

Fri, 04 Jan 2013 09:28 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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सुप्रीम कोर्ट ने खाप पंचायतों को अंतर-जातीय या अंतर-गोत्रीय विवाह करने वाले दंपत्तियों को सम्मान के नाम पर मारने (ऑनर किलिंग) और परेशान करने के मुद्दे पर पक्ष रखने के लिए आमंत्रित किया है। शुक्रवार को सर्वोच्च अदालत ने कहा कि खापों का पक्ष सुनने के बाद ही कोई आदेश जारी किया जाएगा।
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केंद्र सरकार ने हालांकि दलील दी कि वह महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाली खाप पंचायतों की निगरानी से संबंधित एक तंत्र पेश करेगा। क्योंकि जाति के आधार पर गठित इन परिषदों से महिलाओं की सुरक्षा पुलिस नहीं कर सकती।

जस्टिस आफताब आलम व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की पीठ ने हालांकि कहा कि खाप पंचायतों का पक्ष सुने बगैर अदालत कोई भी आदेश जारी नहीं करेगी और मामले पर सुनवाई की अगली तिथि 14 जनवरी तय कर दी।
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इस दौरान पीठ ने तीन जिलों में स्थिति भांपने के लिए पायलट प्रोजेक्ट चलाने की बात कही, जहां खाप पंचायतें बहुत सक्रिय हैं। पीठ ने स्थिति जानने के लिए हरियाणा के रोहतक, जींद व उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के पुलिस अधीक्षकों को समन जारी किया। साथ ही हरियाणा के एडीशनल डीजीपी और मेरठ मंडल के आईजी को भी समन जारी किया।

पीठ ने याचिकाकर्ता शक्ति वाहिनी एनजीओ से कहा कि खापों के शीर्ष लोगों को अदालत के समक्ष पक्ष रखने के लिए सूचित करें। बहुत सारी खाप हैं और उनके विचारों में शायद बहुत भिन्नता होगी। पीठ ने यह तब कहा, जब याचिकाकर्ता और केंद्र की ओर से मीडिया में आई खबरों के हवाले से तमाम मुद्दों पर खापों के विचार रखे गए।

शीर्षस्थ अदालत ने कहा कि यदि हम खापों के विचार जान लेंगे तो हम और संतुष्ट हो जाएंगे। फिलहाल तो हम वही विचार सुन रहे हैं जो उनके खिलाफ हैं। पीठ ने याचिकाकर्ता को खापों की जानकारी कर उन्हें अदालत में पक्ष रखने के बारे में लिखित तौर पर सूचित करने का निर्देश दिया। एनजीओ के अधिवक्ता ने मेहसम चौबिसी और सर्वखाप पंचायतों को इस बारे में सूचित करने की जानकारी पीठ को दी।
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