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नेताओं की बेकाबू जुबां, मचा सियासी घमासान

Fri, 04 Jan 2013 09:14 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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दिल्ली में गैंगरेप की घटना के बाद नेताओं की बेकाबू जुबान संभलने का का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार को संघ प्रमुख मोहन भागवत और मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बड़बोलेपन पर सियासी बवंडर खड़ा हो गया।
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संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि बलात्कार भारत में नहीं इंडिया में होते हैं तो विजयवर्गीय ने कह दिया कि मर्यादा लांघने पर कीमत चुकानी ही होती है जिस तरह सीताजी ने लक्ष्मण रेखा लांघी थी तो उनका अपहरण हो गया था।

संघ प्रमुख का भाजपा ने बचाव किया है जबकि विजयवर्गीय को उनके बयान के लिए फटकार लगाई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर उठे विवाद पर बचाव की मुद्रा में आई भाजपा ने यह कहकर सफाई देने की कोशिश की कि इस टिप्पणी को संपूर्णता में देखने की जरूरत है।
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उन्होंने देश की संस्कृति, परंपरा, संस्कार और मूल्यों की बात कही है जहां महिलाओं के सम्मान को गौरवमयी स्थान मिला हुआ है। इस टिप्पणी को इसी रूप में देखना चाहिए। टिप्पणी को लेकर बनाया गया विवाद अनावश्यक है।

भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि महिलाओं का सम्मान संघ की विचारधारा का मुख्य बिंदु है। राष्ट्रीय सेविका समिति, वनवासी कल्याण केंद्र, विद्या भारती सहित संघ के कई अन्य संगठनों ने महिलाओं के लिए असाधारण कार्य किए हैं और असाधारण उपलब्धियां हासिल की हैं।

संघ के वरिष्ठ नेता राम माधव ने भी भागवत का बचाव करते हुए कहा कि संघ प्रमुख के बयान को उसकी संपूर्णता में देखना उचित होगा। भागवत ने दावा किया था कि बलात्कार जैसी शर्मनाक घटनाएं भारत में नहीं इंडिया में हो रही हैं। उन्होंने भारत का संदर्भ ग्रामीण इलाकों से दिया है जबकि इंडिया का मतलब शहरी क्षेत्रों से है। जहां पश्चिमी संस्कृति हावी है।

वहीं विजयवर्गीय के बयान पर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने नाराजगी व्यक्त की है। भाजपा ने वर्गीय को वह विवादास्पद बयान वापस लेने को कहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मर्यादा लांघने पर कीमत चुकानी होती है जिस तरह सीताजी ने लक्ष्मण रेखा लांघी थी तो उनका अपहरण हो गया था।

बयान से भड़के माकपा कांग्रेस, महिला आयोग
संघ प्रमुख मोहन भागवत और मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयानों की माकपा, कांग्रेस और राष्ट्रीय महिला आयोग ने निंदा करते हुए तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की है। माकपा नेता बृंदा करात ने भागवत की टिप्पणी पर कहा कि संघ प्रमुख को न भारत की समझ है और न ही इंडिया की।

करात ने सरकारी आंकड़ों के हवाले से कहा कि महिलाओं के खिलाफ  अत्याचार और बलात्कार की सबसे अधिक घटनाएं गरीब, दलित और आदिवासी समुदायों में होती हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग की प्रमुख ममता शर्मा ने कहा कि भागवत को भूगोल के आधार पर महिलाओं के खिलाफ अपराधों को विभाजित करना बंद करके वास्तविकता को स्वीकार करना चाहिए। शर्मा ने कहा हम सब भारतीय हैं।

जमीनी स्तर पर जाईए और देखिए कि महिलाओं की क्या स्थिति है। कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने भागवत की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह संघ की मानसिकता को दर्शाता है क्योंकि इंडिया और भारत में कोई फर्क नहीं है।

वहीं, विजयवर्गीय की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस ने मध्य प्रदेश सरकार से उन्हें हटाने की मांग कर दी है। पार्टी ने कहा है कि मंत्री की यह टिप्पणी बेहद शर्मनाक है। राज्य में विपक्ष के नेता अजय सिंह ने कहा कि एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महिलाओं की सुरक्षा का माहौल बनाने और दुष्कर्म जैसी घटनाओं पर संवेदनशील होने की बात कही थी और अब उनकी सरकार का एक मंत्री इस तरह की बातें कह रहा है। ऐसे में मंत्री को तत्काल हटाया जाना चाहिए।
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