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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को दी राहत

Mon, 28 Jan 2013 10:26 PM IST
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
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उत्तराखंड सरकार को अतिरिक्त भूमि उपयोग मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को राज्य के मुख्य सचिव सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने इन अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था जिसे शीर्षस्थ अदालत में चुनौती दी गई थी।
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सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार के पक्ष पर गौर करने के बाद सोशल डेवलपमेंट फाउंडेशन की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया। प्रदेश सरकार की ओर से जस्टिस सीके प्रसाद की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पेश हुई अधिवक्ता रचना श्रीवास्तव ने कहा कि अक्टूबर, 2010 में हाईकोर्ट ने काशीपुर की 1089.82 एकड़ अतिरिक्त भूमि के उपयोग पर राज्य सरकार को एक साल के भीतर निर्णय करने को कहा था।

राज्य सरकार ने इस भूमि का उपयोग जनहित में सरकारी कार्यालयों के निर्माण के लिए किया है। कुल 1059 एकड़ भूमि उपयोग में लायी जा चुकी है और 30.62 एकड़ शेष है जिसका आवंटन याचिकाकर्ता को नहीं किया जा सकता। क्योंकि यह भूमि बहुत छोटे टुकड़ों में है। जबकि फाउंडेशन और उसके सदस्य चाहते थे कि सरकार उन्हें अनुसूचित जाति व जनजाति के कोटे में जमीन दे।
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अधिवक्ता ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का पूरी तरह अनुपालन राज्य सरकार की ओर से किया गया। इसके बावजूद आदेश का अनुपालन न किए जाने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने याचिका को गतवर्ष 18 मई को खारिज कर दिया जिसके खिलाफ शीर्षस्थ अदालत का दरवाजा खटखटाया गया।

अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि मुख्य सचिव सहित जिन चार प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई है। उनमें से कोई भी अब उस पद पर नहीं हैं। मुख्य सचिव पद पर रहे सुभाष कुमार का स्थानांतरण हो चुका है। जबकि अन्य तीन अधिकारियों में से एक सेवानिवृत्त हो चुके हैं अन्य दो का प्रमोशन हो चुका है।

उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट अपने आदेश में यह स्पष्ट कर दिया था कि अवमानना का मामला नहीं बनता। राज्य सरकार ने अतिरिक्त भूमि के उपयोग का स्पष्टीकरण हाईकोर्ट में दे दिया था। इसके बावजूद याचिकाकर्ता ने जानबूझकर शीर्षस्थ अदालत में याचिका दायर की। पीठ ने अधिवक्ता के तर्क से सहमति जताते हुए याचिका को खारिज कर दिया। याद रहे कि शीर्षस्थ अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था।
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