चुनाव आयोग के मना करने के बावजूद प्रत्याशी बच्चों से काम लेना बंद नहीं कर रहे हैं।
18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को प्रचार-प्रसार अभियान में किसी भी रूप में शामिल नहीं करने की आयोग की चिट्ठी को सभी पार्टियां नजरअंदाज कर चुकी हैं।
घर के बड़े, बुजुर्गों के साथ बच्चों को बड़ी संख्या में प्रचार-प्रसार अभियान में शामिल किया जा रहा है। जीत की होड़ में उन्हें चंद रुपये, खाना या मनमाफिक उपहार का लालच देकर अभियान का हिस्सा बनाया जा रहा है।
बाल श्रम के खिलाफ ऐतराज जताते हुए चुनाव आयोग ने सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को पत्र लिखा था। पत्र में चुनाव के दौरान 18 साल से कम उम्र के बच्चों से प्रत्याशियों का गुणगान कराने, पोस्टर चिपकाने व पर्चा वितरण के साथ पार्टी का नारा बुलंद कराने पर आयोग ने कड़ी आपत्ति जाहिर की थी।
आयोग ने कहा था कि पार्टियां विधानसभा और लोकसभा चुनावों में एहतियात बरतते हुए इसका ख्याल रखें। बावजूद इसके तमाम निर्देशों को दरकिनार उम्मीदवारों की रैलियों में बच्चों की पूरी फौज दिखाई दे रही है।
राष्ट्रीय बाल आयोग ने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि चुनाव आयोग के निर्देश का पालन नहीं कर राजनीतिक दल और प्रत्याशी बाल हितों के प्रति अपनी असंवेदनशीलता को दिखा रहे हैं।
इससे यह भी उजागर होता है कि राजनीतिक दलों ने बच्चों से काम नहीं लेने को लेकर अपने प्रत्याशियों को कोई निर्देश नहीं दिया है। आयोग का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से बच्चों के मानसिक विकास पर असर होता है।
घर से ही हो रही शुरुआत
ज्यादातर प्रत्याशी बच्चों को चुनावी अभियान में शामिल करने की शुरुआत घर से ही कर चुके हैं। दादा या पिता के चुनाव जीतने पर मनचाहा उपहार का प्रलोभन उनसे वह सभी काम करा रहा है जो कि घर के बड़े कर रहे हैं।
प्रचार अभियान को परवान चढ़ाते हुए भाजपा उम्मीदवार साहिब सिंह चौहान के नाती हनी (9 वर्ष) कहते हैं कि वे कई दफा दादू की मीटिंग में जाते हैं। उन्हें जिताने के लिए सड़कों और घरों के बाहर स्टीकर पोस्टर चिपकाने का काम भी बखूबी करते हैं।
चौहान ने उनसे जीतने पर मनपसंद उपहार देने का वादा किया है। जबकि उनके परिवार से ही खुशी (11वर्ष) पड़ोस में जमकर प्रचार कर रही है। वह पेंपलेट भी बांटती है। तो दूसरी ओर मनीष सिसौदिया के बेटे मीर सिसौदिया बड़ी सक्रियता से पिता के साथ प्रचार प्रसार में भाग ले रहे हैं। जबकि वह सिर्फ पांचवीं कक्षा में हैं।