सुप्रीम कोर्ट ने हिजड़ों को समान अधिकार व संरक्षण तथा देश में तीसरे लिंग को दर्जा देने की मांग वाली जनहित याचिका पर सोमवार को केंद्र व राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया। इस मुद्दे पर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नाल्सा) की ओर से याचिका दायर की गई है।
जस्टिस केएस राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ ने नाल्सा की ओर से पेश अधिवक्ता की दलीलों पर गौर करने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, शहरी एवं ग्रामीण मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास और सामाजिक कल्याण मंत्रालय सहित सभी राज्य सरकारों से जवाब तलब किया।
नाल्सा ने पीठ के समक्ष कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हिजड़े संविधान में दिए गए मूल अधिकारों से मरहूम रहते हैं। देश में महिला और पुरुष दो ही लिंग है, जबकि अन्य के लिए तीसरे लिंग को दर्जा दिए जाने पर विचार तक नहीं किया गया। हिजड़ों को समान अधिकार और संरक्षण प्रदान करने के लिए जरूरी है कि तीसरे लिंग को दर्जा दिया जाए।
नाल्सा के मुताबिक देश का नागरिक होने के नाते हिजड़ों को वह तमाम अधिकार एवं सुविधाएं मिलनी चाहिए, जो एक आम नागरिक को मिलती है। लेकिन उनके लिए परिवार और समाज के दरवाजे बंद रहते हैं। उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, सार्वजनिक सेवाओं में भी प्रतिबंधित रखा गया है।
पीठ के समक्ष नाल्सा ने कहा कि हिजड़ों को जीवकोपार्जन के लिए कोई रोजगार नहीं मिलता। यही नहीं उनके पासपोर्ट, राशनकार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे पहचान पत्र देने से भी इनकार किया जाता है। हिजड़ों के साथ इस तरह का व्यवहार संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 21 का उल्लंघन है। पीठ ने नाल्सा के तर्क से सहमति जताते हुए प्रतिपक्षों से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। गौरतलब है कि नाल्सा गरीबों को मुफ्त कानूनी सेवा प्रदान कराने वाला प्राधिकरण है।