देश में महिलाओं की सुरक्षा के प्रति लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि आजादी के इतने सालों बाद भी पुलिस का रवैया नहीं बदला है और उसने असहाय महिलाओं को बड़ी बर्बरता से पीटा।
सर्वोच्च अदालत ने यह टिप्पणी पंजाब और बिहार में महिलाओं के खिलाफ पुलिस की बर्बर कार्रवाई पर की। सर्वोच्च अदालत में इस मसले पर पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सहित आठ राज्यों ने हलफनामा दाखिल किया है।
याद रहे कि पंजाब के तरनतारन और बिहार के पटना में महिलाओं पर बर्बर कार्रवाई पर स्वत: संज्ञान लेने के बाद शीर्षस्थ अदालत ने इस मामले में सभी राज्यों से जवाब तलब किया था।
जस्टिस जीएस सिंघवी की अध्यक्षता वाली पीठ ने महिलाओं के प्रति पुलिस की असंवेदनशीलता को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि नियुक्ति की प्रक्रिया में इस बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। दरअसल यह समस्या नियुक्ति के रास्ते में ही है। हम सभी जानते है कि इन पहलुओं को चयन के दौरान महत्व दिया जाना चाहिए।
वहीं पीठ के समक्ष अदालत के सहायक व वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने तरनतारन मामले की मजिस्ट्रेट जांच पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पुलिस वालों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। बिहार सरकार के हलफनामे पर भी साल्वे ने सवाल उठाते हुए स्पष्ट किया कि अदालत ने जिन सवालों पर जवाब देने को कहा था, उस पर राज्य सरकार ने जवाब ही नहीं दिया है।
बिहार सरकार ने पीठ से कहा कि घटना में कोई भी महिला घायल नहीं हुई थी। इस पर पीठ ने राज्य सरकार से कहा कि यदि आप वीडियो क्लिप देखे तो आप अचंभित हो जाएंगे। अदालत ने राज्य के हलफनामे पर असंतोष जताते हुए कहा कि यह स्वीकार योग्य नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामा न दाखिल करने वाले राज्यों के मुख्य सचिवों को चेतावनी देते हुए कहा कि मंगलवार शाम तक यदि जवाब नहीं दाखिल किया गया तो अदालत उनके खिलाफ कड़ा कदम उठाएगी। अदालत ने अटॉर्नी जनरल, पुलिस सुधार मामले के याचिकाकर्ता व उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी और वरिष्ठ अधिवक्ता यूयू ललित को भी इन हलफनामों की प्रति उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। इस मसले पर अदालत 4 अप्रैल को अगली सुनवाई करेगी।
यौन अपराधों पर केंद्र, राज्यों से जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महिलाओं के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों पर दाखिल जनहित याचिका (पीआईएल) पर केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र प्रशासित राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। याचिका में सजा देने के दिशा निर्देशों के साथ ही प्रभावी निवारक और सुरक्षात्मक कदम उठाने की मांग की गई है।
जस्टिस केएस राधाकृष्णन और दीपक मिश्रा की बेंच ले कहा कि जिम्मेदार लोगों को नोटिस जारी कर दिया गया है और उनसे तीन हफ्ते के अंदर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। बेंच ने कानून और न्याय मंत्रालय, महिला और बाल कल्याण तथा गृहमंत्रालय के साथ ही सभी राज्यों और केंद्र प्रशासित राज्यों को भी नोटिस जारी किया है। वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा और अन्य ने 16 दिसंबर को दिल्ली में चलती बस में 23 वर्षीय युवती के साथ हुई गैंगरेप की घटना के चलते यह पीआईएल दाखिल की है।