करीब दो साल पहले बसपा शासन के दौरान सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और उनके पुत्र अखिलेश को कथित रूप से संसद आने से रोकने के मामले में संसदीय समिति ने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन डीजीपी और लखनऊ के एसएसपी को तलब करने का फैसला किया है।
इन दोनों नेताओं ने आरोप लगाया था कि मार्च, 2011 में उन्हें संसद की कार्यवाही में भाग लेने से रोकने के लिए लखनऊ स्थित उनके आवास के बाहर बैरीकेड्स लगा दिए गए थे ताकि वे घर से बाहर न निकल पाएं। उस समय राज्य की मुख्यमंत्री मायावती थीं और ये दोनों सपा नेता लोकसभा के सदस्य थे।
इस पैनेल के प्रमुख पीसी चाको ने कहा कि किसी सांसद को संसद की कार्यवाही से रोकना विशेषाधिकार का हनन है इसलिए लोकसभा की विशेषाधिकार समिति ने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन डीजीपी करमवीर सिंह और लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रहे डीके ठाकुर को तलब करने का फैसला किया है।
आठ मार्च, 2011 को मुलायम सिंह ने तत्कालीन लखनऊ के डीएम और डीआईजी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस दिया था कि उन्हें संसद की कार्यवाही में भाग लेने से जबरन रोका गया जबकि अखिलेश ने आरोप लगाया था कि उन्हें रोकने के लिए लखनऊ में उनके घर के बाहर बैरीकेड्स लगा दिए गए थे और भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात कर दिया था।
दूसरी ओर इस कमेटी ने भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह के खिलाफ की गई कांग्रेस सांसद मीनाक्षी नटराजन की शिकायत पर कोई आखिरी फैसला नहीं लिया है। नटराजन ने आरोप लगाया था कि राजनाथ ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर झूठे व आधारहीन आरोप लगाए हैं कि उन्होंने राजीव गांधी ट्रस्ट के लिए हरियाणा के किसानों से जबरन जमीन हथिया ली है।