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व्हीलचेयर पर बैठकर ही झुका लिया आसमान

Wed, 16 Dec 2015 03:50 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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इलाहाबाद की नेहा मेहरोत्रा ने जिद ठानी, तो उम्मीदों का आसमान व्हीलचेयर पर झुक आया। और आज नेहा पर टिकी हुई हैं प्रदेश के सैकड़ों ऐसे बच्चों की नजरें, जो शारीरिक अक्षमता को अभिशाप मानकर चुप बैठ गए थे।
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इलाहाबाद की नेहा मेहरोत्रा की उम्र भले ही छोटी हो, पर इरादे इतने बड़े कि मुश्किलें भी घुटने टेक दें।  नेहा `स्पाइनल मस्कुलर डिस्ट्रॉफी’ नाम की बीमारी से पीड़ित हैं। इस वजह से उनके शरीर का 80 प्रतिशत हिस्सा विकलांग हो गया। सामान्य बच्चों की तरह वह न तो ठीक से बैठ पाती हैं, न ही चल पाती हैं।

पैर और हाथ दोनों से लाचार हैं, लेकिन यह उसका जज्बा ही है कि अपनी शारीरिक अक्षमता को कभी खुद के हौसलों पर हावी नहीं होने दिया। शारीरिक अक्षमता को हराने वाली नेहा को वैसे तो मां-बाप का सहारा है, फिर भी होश संभालने के बाद नेहा ने खुद से वादा किया कि वह बोझ नहीं बनेगी।
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बचपन से ही नेहा पढ़ाई के साथ-साथ अन्य कई क्विज प्रतियोगिताओं में भी अव्वल आती रही हैं। उनकी प्रतिभा को देश ने भी पहचाना।  2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने नेहा को राष्ट्रीय बालश्री सम्मान से सम्मानित भी किया था। इस पुरस्कार ने देश और दुनिया को दिखा दिया कि जिद हो, तो शारीरिक अक्षमता के वावजूद जीत होती है।

सीबीएसई की बारहवीं की परीक्षा में नेहा ने ऑल इंडिया में दूसरा स्थान पाकर अच्छे-अच्छों को हैरान कर दिया था। यही नहीं, सीबीएसई की नेशनल इन्टेल साइंस एग्जीबिशन में भी नेहा सम्मानित हो चुकी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने साहस दिखाने के लिए नेहा को वर्ष 2013 में रोल मॉडल सम्मान से भी नवाजा है।

 `अमूल इंडिया’ भी नेहा को विद्याश्री सम्मान से सम्मानित कर चुका है। उम्मीदों का आसमान नेहा के व्हीलचेयर पर टिका हुआ है और नेहा पर टिकी हुई हैं प्रदेश के सैकड़ों ऐसे बच्चों की नजरें, जो शारीरिक अक्षमता को अभिशाप मानकर चुप बैठ गए थे। नेहा आईएएस बनना   चाहती हैं।
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