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जीवन और सोच में लगाई लंबी छलांग

Wed, 16 Dec 2015 03:01 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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बचपन में पोलियो जैसी बीमारी की वजह से मुरादाबाद की कंचन खन्ना के शरीर का 80 प्रतिशत हिस्सा काम नहीं करता है, इसके बावजूद कंचन ने अपनी जिंदगी में एक लंबी छलांग लगाई और आज वह एक अच्छी अध्यापिका और लेखिका हैं, साथ में बहुतों के लिए मार्गदर्शक भी।
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बचपन में कंचन को देखकर कई स्कूलों ने एडमिशन देने से मना कर दिया। मुरादाबाद की इस लड़की के शरीर का 80 प्रतिशत हिस्सा काम नहीं करता है। फिर भी कंचन ने हार नहीं मानी। खुद घर बैठकर पढ़ती और बच्चों को कोचिंग भी कराती। यह सफर यूं ही चलता रहा।

कक्षा 9वीं तक की पढ़ाई घर पर बैठकर की। कक्षा दस में जब परीक्षा देने की अनुमति न मिली, तो कोर्ट का सहारा लेकर परीक्षा में शामिल हुई। इसी तरह बीए, एमए तक की शिक्षा पूरी करने के बाद कंचन ने कक्षा 6 से 10वीं  तक के छात्रों के लिए अंग्रेजी ग्रामर और वर्कबुक लिखीं, जो किताबें अब मुरादाबाद के स्कूलों में छात्रों का भविष्य संवार रही हैं।
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अपनी शारीरिक अक्षमता से हार न मानने वाली कंचन आज मुरादाबाद में अक्षम बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग सेंटर भी चलाती हैं। वह अपने कोचिंग सेंटर से अक्षम व गरीब छात्रों को कम्प्यूटर शिक्षा देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में लगी हुई हैं। सच! कंचन का यह कार्य बेहद सराहनीय है, जो विकलांग होते हुए भी दूसरों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं। कंचन के भाई आशीष भी शारीरिक रूप से अक्षम हैं।

सन् 2010 में कंचन ने ऐसे शारीरिक रूप से अशक्त बच्चों को सम्मानित करने का काम भी किया, जो अपने-अपने क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। कंचन के हौसले को राज्य सरकार ने भी माना है। 2009 में राज्य सरकार उन्हें `दक्ष विकलांग व्यक्ति’ पुरस्कार से सम्मानित भी कर चुकी है। अपनी लाचारी पर जीत हासिल करने की इस सफलता को कंचन एक लंबी छलांग के रूप में देखती हैं-,`जिंदगी को ऐसी लंबी छलांग चाहिए तो हिम्मत तो जुटानी पड़ेगी।’
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