जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) को खत्म कर इसके बदले नकद सब्सिडी योजना शुरू होने से पहले ही दम तोड़ सकती है। तीन केंद्रशासित राज्यों पुडुचेरी, चंडीगढ़ और दादर-नागर हवेली में पायलट प्रोजेक्ट पर चल रही नकद सब्सिडी योजना के दौरान आई कई व्यावहारिक जटिलताओं का निदान सरकार के पास नहीं है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने भी खासतौर पर ग्रामीण भारत में इस योजना को शुरू करने के मामले में हाथ खड़ा कर लिया है।
हालांकि शहरी भारत के लिए सरकार के प्रयास जारी हैं, मगर यहां भी नकद सब्सिडी योजना शुरू करने से पहले सरकार पायलट प्रोजेक्ट के नतीजे का इंतजार करेगी।
मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही पीडीएस को बंद करने और इसके तहत अनाज सहित अन्य वस्तुओं पर मिलने वाली सब्सिडी की रकम को सीधे उपभोक्ता के बैंक खाते में डालने की योजना तैयार की थी।
तब सरकार ने पीडीएस को बंद करने की योजना का विपक्ष ही नहीं अपनी ही पार्टीशासित राज्यों के विरोध की भी परवाह नहीं की थी।
उल्लेखनीय है कि इस समय सरकार पीडीएस में प्रतिवर्ष बतौर सब्सिडी 136000 करोड़ रुपये खर्च करती है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ सहित कई अन्य राज्य अपनी ओर से उपभोक्ताओं को अलग से सब्सिडी देते हैं।