सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय की मुसीबतें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। सहारा को जमानत के लिए पैसा जुटाने की मुहिम को बैंक ऑफ अमेरिका की ओर से भी झटका लगा है। बैंक ऑफ अमेरिका ने सहारा समूह के उस दावे को खारिज कर दिया है कि अमेरिका की एक इकाई की ओर से सहारा समूह को दो अरब डॉलर की वित्तीय सहायता पैकेज के सौदे में वह बैंकर की भूमिका निभा रहा है।
बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच के प्रवक्ता ने कहा कि वह किसी भी तरह से इस लेनदेन के साथ नहीं जुड़ा है। जबकि इससे पहले सहारा समूह ने कहा था कि सुब्रत को जमानत पर छुड़ाने के लिए धन को लेकर उसका अमेरिका के मिराक कैपिटल समूह के साथ सौदा हो चुका है।
हालांकि मिराक कैपिटल समूह के बारे में इससे पहले लोगों को अधिक जानकारी नहीं थी। उच्चतम न्यायालय के 9 जनवरी के आदेश के मुताबिक सहारा के वकील ने न्यायालय के समक्ष एक पत्र पेश कर कहा था कि बैंक ऑफ अमेरिका के सहारा इंडिया परिवार के नाम भेजे एक संदेश में कहा गया है कि मिराक कैपिटल ग्रुप एलएलसी के निर्देश के तहत 105 करोड़ डॉलर की राशि अलग कर दी गई है और यह मिराक कैपिटल और सहारा समूह के बीच किए जा रहे सौदे के लिए 20 फरवरी, 2015 तक रखी गई है।
भारतीय मूल के सारांश शर्मा द्वारा संचालित कंपनी मिराक को इस सबंध में भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं मिला। लेकिन बैंक ऑफ अमेरिका के इस बयान से इस तथाकथित सौदे को लेकर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं। मालूम हो कि सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय करीब एक साल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन्हें जेल से बाहर निकालने के लिए सहारा समूह हर जतन करने का प्रयास कर रहा है।