कांग्रेस के शिखर नेतृत्व राहुल-सोनिया गांधी पर जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी के आरोपों की सियासत गरमा गई है। अपने आरोप पर कायम स्वामी ने कांग्रेस नेता के नोटिस पर पलटवार करते हुए चुनौती दी कि राहुल गांधी को पत्र भेजने की बजाय अदालत में जाकर उनके खिलाफ अवमानना का मामला दाखिल करना चाहिए।
इधर, भाजपा ने गांधी परिवार पर स्वामी के आरोपों में सियासी चिंगारी सुलगा दी है। पार्टी ने कहा कि कांग्रेस को स्वामी के आरोपों पर जनता को जवाब देना चाहिए।
स्वामी गांधी परिवार पर लगाए अपने आरोपों पर कायम हैं। स्वामी ने कहा कि उन्हें राहुल गांधी अथवा उनके वकील की ओर से अब तक कोई पत्र नहीं मिला है। राहुल गांधी को सलाह देते हुए स्वामी ने कहा कि उन्हें पत्र लिखने की बजाए अदालत में जाकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। स्वामी ने कहा कि वह राहुल के साथ अदालत में लड़ने को तैयार हैं। इधर, इस प्रकरण में स्वामी के पक्ष में भाजपा भी कूद पड़ी है।
हिमाचल प्रदेश के चुनाव को लेकर शिमला में डटे भाजपा नेता व राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि कांग्रेस को इस बात का जवाब देना चाहिए कि उसने अब बंद हो चुके नेशनल हेराल्ड को चलाने वाली एसोसिएट जर्नल को 90 करोड़ रुपये का भुगतान किया था कि नहीं। यदि यह आरोप सही है तो यह चुनाव और टैक्स से संबंधित कानूनों के खिलाफ है।
भाजपा के ही एक अन्य नेता बलवीर पुंज ने कहा कि इन आरोपों के सामने आने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी को खुद ही इनकी निष्पक्ष जांच के आदेश देने चाहिए थे, लेकिन अब तक ऐसा नहीं होना खेद का विषय है।