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स्वामी बोले, नेहरू ने किया देश का सत्यानाश

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मेरठ में स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने देश का सत्यानाश किया।
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उन्होंने कहा कि नेहरू ने नेताजी के खिलाफ षड्यंत्र रचा। देश में प्रचलित इतिहास की किताबें आजादी में आजाद हिंद फौज और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भूमिका का सच सामने नहीं रखतीं। अंग्रेजों ने आजाद हिंद फौज के बढ़ते प्रभाव की वजह से भारत छोड़ा।

डॉ. सुब्रमण्यम ने कहा, नेशनल कांग्रेस पार्टी ने इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया। अंतरराष्ट्रीय इतिहासकारों ने भारत की आजादी में बारे में जो जानकारियां उपलब्ध कराईं, वह वास्तविकता से परे हैं। आजादी नेताजी की वजह से मिली। अंग्रेज जानते थे महात्मा गांधी अहिंसावादी हैं और हमारे समर्थक भी। विश्वास कर सत्ता इनके हाथ में सौंप सकते हैं और नेताजी की फौज से आसानी से बचकर निकल सकते हैं।
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'नेताजी की मृत्यु हवाई दुर्घटना में नहीं हुई'

बकौल डॉ. स्वामी, मेरठ निवासी नेहरू के टाइपराइटर श्यामलाल जैन ने खोसला आयोग के सामने दिए बयान में कहा था कि रूस से मिले स्टॉलिन के पत्र के जवाब में नेहरू ने इंग्लैंड सरकार को पत्र लिखकर सुभाष चंद्र बोस के बारे में तत्कालीन सरकार से फैसला लेने की बात कही थी।

नेताजी की मृत्यु हवाई दुर्घटना में नहीं हुई, बल्कि वह रूस पहुंच गए थे। इस अवसर पर उन्मुक्त भारत के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. अतुल कृष्ण और डॉ. स्वामी ने आजाद हिंद फौज का ध्वजारोहण किया।

डॉ. अतुल ने कहा कि देश में नेता सिर्फ एक सुभाष चंद्र बोस थे। उनकी बराबरी कोई नहीं कर सकता। 21 अक्तूबर 1943 को नेताजी ने देश की आजादी की घोषणा की थी। इस दिन राष्ट्रगान, राष्ट्रध्वज, मुद्रा, डाक टिकट आदि अपने थे। इन सबको नौ देशों ने मान्यता दी।
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‘पुरस्कार के लायक ही नहीं सम्मान लौटाने वाले’

भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी का कहना है दादरी कांड के बाद जो साहित्यकार पुरस्कार लौटा रहे हैं, वे पुरस्कार के लायक ही नहीं हैं। इन साहित्यकारों को न भाजपा की सरकार में पुरस्कार दिया गया है और न ही भाजपा ऐसे लोगों को कभी पुरस्कार देगी। उन्होंने साहित्यकारों पर सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने दादरी के इकलाख हत्याकांड के लिए यूपी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। कहा कि अखिलेश सरकार ने जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें कहीं भी इसका जिक्र नहीं है कि वारदात के लिए कोई संगठन जिम्मेदार है या यह सुनियोजित था। आरोप लगाया प्रदेश सरकार नाच-गाने में व्यस्त है। साहित्यकारों के पुरस्कार लौटाने के सवाल पर उन्होंने कहा ऐसा करने वाले साहित्यकार पुरस्कार के लायक नहीं हैं। देश में गोहत्या पर हो रहे बवाल पर कहा कि संविधान की धारा-48 में गोहत्या को निषेध घोषित किया गया है।

फरीदाबाद में दलित की हत्या के मामले पर उन्होंने कहा वह मामले की जांच करा रहे हैं। देश में सांप्रदायिकता का माहौल अंग्रेज बनाकर गए थे। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए कहा कि वह सोनिया गांधी का आर्डर मानते थे। नेताजी की मौत के रहस्य के बारे में कहा कि 23 जनवरी को फाइल खुलने पर यह सामने आ जाएगा। राष्ट्रगान के कुछ शब्दों को लेकर उठ रहे विवाद पर उन्होंने कहा पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान लागू करते समय वचन दिया था कि जरूरत के हिसाब से राष्ट्रगान के शब्दों में परिवर्तन किया जाएगा। ऐसे में अधिनायक जैसे शब्द हटा देने चाहिए।
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