जिंदल उद्योग समूह से 100 करोड़ रुपये की वसूली के प्रयास के मामले में जी न्यूज के चेयरमैन सुभाष चंद्रा व उनके पुत्र पुनीत गोयनका (प्रबंध निदेशक) को अदालत ने पुलिस के साथ सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जांच अधिकारी के पास अपने पासपोर्ट सौंपने को कहा है।
अदालत के पूछने पर जब जांच अधिकारी व सरकारी वकील यह नहीं बता पाए कि दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ जरूरी है या नहीं, तब कोर्ट ने चंद्रा और गोयनका की गिरफ्तारी पर 14 दिसंबर तक रोक लगा दी। अदालत में सरकारी वकील ने कहा यदि जरूरत पड़ी तो गिरफ्तारी हो सकती है।
साकेत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजरानी मित्रा ने 14 दिसंबर तक गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए दोनों को जांच में सहयोग करने का आदेश दिया है। उल्लेखनीय है कि जी न्यूज के दो संपादकों सुधीर चौधरी व समीर अहलूवालिया की वसूली के प्रयास में गिरफ्तारी के बाद चंद्रा लंदन चले गए थे।
पुलिस उन्हें तीन बार पूछताछ के लिए आने का नोटिस भेज चुकी है। अब अदालत ने स्पष्ट कहा है कि चंद्रा और गोयनका को जांच एजेंसी ने पूछताछ के लिए 8 दिसंबर को बुलाया है, यदि बाद में भी उनसे पूछताछ की जरूरत होती है तो उन्हें पेश होना पड़ेगा।
इससे पूर्व चंद्रा के वकील विजय अग्रवाल व पुनीत गोयनका की वकील गीता लूथरा ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किलों को फर्जी मामले में फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्रा जी न्यूज में मात्र दिखावे के रूप में कार्यकारी चेयरमैन हैं, जबकि पुनीत प्रबंध निदेशक हैं। उन्होंने कहा कि इन दोनों की जिंदल स्टील से उगाही के प्रयास में कोई भूमिका नहीं है।
उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी के नोटिस का हम पहले ही जवाब दे चुके हैं। पुलिस ने पुन: नोटिस जारी कर आठ दिसंबर को बुलाया है, मगर हमें गिरफ्तारी की आशंका है। उन्होंने कहा कि पुलिस जी कंपनी के 25 कर्मचारियों से पूछताछ कर चुकी है। ऐसे में दोनों को अग्रिम जमानत दी जाए या उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए।
अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए वरिष्ठ सरकारी वकील राजीव मोहन ने तर्क रखा कि चंद्रा व गोयनका ने चौधरी और अहलूवालिया के साथ मिलकर जिंदल समूह से 100 रुपये की वसूली का षड्यंत्र रचा। इसी कड़ी में उन्होंने कोल आवंटन संबंधी कैग रिपोर्ट को गलत तरीके से चैनल पर दिखाई।
उन्होंने कहा कि 100 करोड़ का विज्ञापन मांगने से स्पष्ट है कि उन्होंने ब्लैकमेल किया है। इतनी बड़ी राशि मांगना बिना मालिक की सहमति से संभव नहीं है। इन सभी ने मीडिया का गलत फायदा उठाया है इसलिए पूछताछ जरूरी है।
गिरफ्तारी पर उन्होंने कहा कि वे अभी से कैसे कह दें, पूछताछ के दौरान एक मिनट या फिर पांच मिनट में भी गिरफ्तारी हो सकती है और यह सब जांच अधिकारी पर निर्भर है कि गिरफ्तारी जरूरी है या नहीं।