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'गांधी की तरह बोस भी देश विभाजन के खिलाफ थे'

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आजाद भारत की तस्वीर को लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की सोच में काफी समानता और आपसी सूझबूझ थी। इस बात का दावा करने वाली सुभाषचंद्र बोस की पुत्री अनिता बोस का कहना है कि नेताजी ने ही महात्मा गांधी को सबसे पहले राष्ट्रपिता कहा।
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कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं के साथ बोस के संबंधों से परदा हटाते हुए अनिता ने कहा है कि नेताजी ने खुद से कांग्रेस पार्टी को नहीं छोड़ा बल्कि साजिश कर उन्हें कांग्रेस से बाहर निकाला गया। जर्मनी में रह रहीं नेताजी की पुत्री अनिता बोस ने बीबीसी के पूर्व पत्रकार और फिल्म निर्माता ललित मोहन जोशी को दिए एक साक्षात्कार में कहा है कि महात्मा गांधी और उनके पिता (सुभाष चंद्र बोस) में काफी समानताएं थीं।

आजाद भारत के भविष्य के मामले में नेताजी भी गांधी की तरह देश विभाजन के खिलाफ थे। धर्म और धार्मिक विषयों में भी दोनों की सोच एक जैसी थी। दोनों ही धर्म में ज्यादा विश्वास करते थे। जबकि पंडित जवाहर लाल नेहरू की विचारधारा समाजवाद की थी। नेताजी भी धर्मनिरपेक्ष भारत के पक्ष में थे। जहां सभी धर्म के लोग आदर के साथ रह सकें।
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डाक्यूमेंट्री फिल्म देशभर में प्रसारित करने की तैयारी

अनिता का कहना है कि उनके पिता बचपन से ही एक मजबूत इरादे वाले इंसान थे। नेहरू की तरह उनके भी कुछ मुद्दों पर गांधी से टकराव थे। लेकिन नेहरू और नेताजी में फर्क इतना था कि नेहरू अपनी बात त्याग कर टकराव को भुला देते थे। मगर नेताजी अपनी बातों पर अडिग रहते थे।

वहीं देश के विकास के मामले में नेताजी की सोच आधुनिक थी। गांधी के ग्राम स्वराज के बजाय उनकी सोच नेहरू के समाजवाद की ओर झुकी हुई थी। वह देश में बडे़-बडे़ उद्योग लगाने के भी पक्षधर थे। दरअसल, नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक कर उनके मौत के रहस्य से परदा हटाने के सरकार के ऐलान के बाद अनिता बोस का यह खुलासा सामने आया है।

नेताजी सुभाष चंद्र फाउंडेशन, यूके और साउथ एशिया सिनेमा फाउंडेशन ने संयुक्त प्रयास से एक डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाई है। जिसमें नेताजी के रहस्यों का खुलासा किया गया है। इस डाक्यूमेंट्री को देशभर में प्रसारित करने की तैयारी है। नेताजी पर सरकार के खुलासे से पहले इस प्रयास को माहौल गर्माने की कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है।
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