राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने दो नेताओं राम माधव और शिव प्रकाश को भाजपा में शामिल कराकर पार्टी पर अपना प्रभुत्व बढ़ाने के साफ संकेत दे दिए हैं।
साथ ही इस उसने अब तक भाजपा के कामकाज में किसी तरह के सीधे दखल न देने के अपने पुराने आवरण को भी उतार फेंका है।
राम माधव को पार्टी में शामिल करने की योजना को पार्टी का दक्षिण के राज्यों में नए सिरे से आधार बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा में अपने समर्थकों की फौज चाहता है संघ
माना जा रहा है कि राम माधव को पार्टी महासचिव बनाया जाएगा। उन्हें वर्तमान संगठन महासचिव रामलाल की जगह दी जाएगी। रामलाल को प्रचारक प्रमुख बनाए जाने की तैयारी है।
भाजपा पर नियंत्रण के लिए संघ की भूमिका राज्यों में संगठन मंत्री नियुक्त करने और राष्ट्रीय टीम में संगठन महासचिव, सह सचिवों को नियुक्त करने तक ही रहती थी।
अपवाद स्वरूप संघ खुद से सीधे जुड़े कुछ नेताओं को भाजपा में भेजती रही थी। मगर इस बार स्थिति उल्टी है। संघ न केवल पार्टी संगठन में अपने समर्थकों की फौज खड़ी करना चाहता है, बल्कि यह भी संदेश देना चाहता है कि उसका भाजपा के निर्णयों में सीधा दखल है।
यही कारण है कि संघ की सर्वोच्च इकाई ने न केवल इन दो नेताओं को भाजपा में शामिल करने का फैसला किया, बल्कि इसकी सार्वजनिक घोषणा भी की।
कुछ और नेता हो सकते हैं भाजपा में शामिल
संघ सूत्रों का कहना है कि इन दो वरिष्ठ नेताओं को भाजपा में शामिल किए जाने के कई संदेश हैं।
मसलन राम माधव को पार्टी में शामिल कराने के पीछे दक्षिण के राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति तो है ही, साथ ही बड़ा संदेश यह है कि इस बार संघ ने इन नियुक्तियों के जरिए पहली बार खुलकर स्वीकार किया है कि भाजपा की गतिविधियों में उसका सीधा दखल है।
यही कारण है कि संघ ने भाजपा में शामिल करने के लिए राम माधव के रूप में जाने माने चेहरे को पेश किया है। संघ सूत्रों के मुताबिक चूंकि मोदी के प्रधानमंत्री बन जाने और उनके करीबी अमित शाह का अध्यक्ष बनना तय हो जाने के बाद पार्टी संगठन के निष्प्रभावी होने का खतरा पैदा हो गया है। इसलिए संघ राष्ट्रीय टीम में खुद से जुड़े नेताओं की संख्या बढ़ाकर सत्ता और सरकार के बीच संतुलन साधना चाहता है।
एक सूत्र का कहना है कि निकट भविष्य में इसी रणनीति के तहत संघ अपने कुछ और नेताओं को भाजपा में शामिल करने का फैसला कर सकता है।
हालांकि भाजपा सूत्रों का कहना है कि राम माधव मोदी की पसंद हैं। आगामी डेढ़ साल के अंदर पार्टी के प्रभाव वाले 9 राज्यों में बेहतर प्रदर्शन के लिए खुद मोदी ने ही राम माधव सहित संघ के कुछ नेताओं को भाजपा में शामिल करने का अनुरोध किया था।