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दहेज लेने वालों हो जाओ सावधान!

Tue, 26 Feb 2013 10:26 AM IST
नई दिल्ली/प्रियंवदा सहाय
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देश में हर साल हजारों महिलाएं दहेज की बलि चढ़ जाती हैं। ऐसे में दहेज लोभियों पर नकेल कसने के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। सरकार इस अपराध के दोषियों पर न्यूनतम पांच साल की सजा के साथ अनिवार्य तौर भारी-भरकम जुर्माना ठोंकने का प्रावधान लाने की तैयारी में है।
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दहेज का लेनदार साबित होने पर कम से कम पांच लाख रुपये जुर्माना या दहेज की पूरी कीमत में से जो अधिक हो उसका भुगतान करना होगा। सरकार दहेज निषेध कानून में संशोधन कर इसे जल्द अमलीजामा पहनाएगी।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय इस संशोधन को जल्द कैबिनेट में पेश करने की तैयारी में है। हालांकि मंत्रालय ने इस मसौदे में दहेज देने वालों की सजा कम करने की पेशकश भी की है। उसका मानना है कि दहेज देने वाला किसी न किसी दबाव में दहेज प्रतिबंधक कानून का उल्लंघन कर रहा होता है।
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इसलिए दहेज देने वाले की सजा को कम कर न्यूनतम एक लाख रुपये के जुर्माने के साथ एक साल की सजा देने का प्रस्ताव है। हालांकि उनसे भी दहेज की पूरी कीमत के बराबर जुर्माना वसूला जा सकता है। मौजूदा कानून के मुताबिक अब तक दहेज लेन-देन में दोनों पक्ष के लिए न्यूनतम पांच साल की सजा और कम से कम 15 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।

कानून में संशोधन के बाद दहेज प्रतिबंधक अधिकारियों के काम का बोझ भी बढ़ जाएगा। उसे शादी के वक्त वर-वधू पक्ष की ओर से दिये गए उपहारों की सूची को सुरक्षित रखना जरूरी होगा। मंत्रालय के मुताबिक समाज में दहेज के लोभियों के खिलाफ जागरुकता फैलाने, स्कूल, कॉलेजों में इस बाबत जागरूकता फैलाने में योगदान देना भी होगा। राज्य सरकारों के लिए यह जरूरी होगा कि वह जिला स्तर पर जिला अधिकारी की अध्यक्षता में इस मामले में सलाहकार बोर्ड स्थापित करे।

मौजूदा प्रावधान
वर्तमान कानून के मुताबिक अब तक दहेज लेन-देन में दोनों पक्ष के लिए न्यूनतम पांच साल की सजा और कम से कम 15 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।

और क्या है मसौदे में
मंत्रालय ने मसौदे में महिला की संपत्ति के दायरे में स्त्री धन, उपहार को दहेज के साथ शामिल किया है। यदि महिला की मृत्यु हो जाती है तो उसकी संपत्ति यानी दहेज, स्त्री धन या उपहार उसके बच्चों या परिजनों को हस्तांतरित करना अनिवार्य हो जाएगा। अगर महिला के बच्चे नहीं हैं तो यह संपत्ति उसके अभिभावक को सौंपी जाएगी।

मसौदे में स्पष्ट किया गया है कि कानून में संशोधन के बाद महिलाएं दहेज के खिलाफ अपने निवास, परिजनों की रिहाइश, अध्ययन स्थल या जिस शहर में कार्यरत हैं, वहां से केस दर्ज करा सकती हैं। मसौदे में यह प्रस्ताव किया गया है कि वर-वधू पक्ष उपहारों की सूची पर हस्ताक्षर कर इसे दहेज प्रतिबंधक अधिकारी को भी सौंपेंगे। इस सूची को नहीं तैयार किया गया तो सजा भी हो सकती है।
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