सीबीआई प्रमुख रंजीत सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया है कि स्टेटस रिपोर्ट के मसौदे में अधिकांश बदलाव उनके अधिकारियों ने रिपोर्ट को बेहतर बनाने के इरादे से तत्कालीन एएसजी हरेन रावल, उनकी मदद कर रहे वकीलों या कानून मंत्री की सलाह से किए थे।
सिन्हा ने कहा है कि रिपोर्ट कानून मंत्री, अटॉर्नी जनरल, पीएमओ व कोयला मंत्रालय के अधिकारियों के अलावा तत्कालीन एएसजी हरेन रावल से ही साझा की गई थी।
निदेशक ने कहा कि इस समय हर बदलाव के बारे में निश्चित रूप से यह बताना मुश्किल है कि वह किस व्यक्ति विशेष के कहने पर किए गए। लेकिन सिन्हा ने यह स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट के मसौदे में किए गए बदलावों से जांच में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया और न ही जांच के केंद्र में कोई बदलाव किया गया।
वहीं, कानून मंत्री और दूसरे अधिकारियों को प्रगति रिपोर्ट दिखाने के औचित्य के बारे में अदालत की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में सिन्हा ने कहा है कि विभागीय परिपत्र और सरकार के निर्देश इस बिंदु पर खामोश हैं।
उन्होंने कहा है कि कानून मंत्री, पीएमओ व कोयला मंत्रालय के अधिकारियों के साथ हुई बैठक का कोई विवरण तैयार नहीं किया गया था। हलफनामे में दिया गया विवरण उनकी और उनके अधिकारियों की याददाश्त पर आधारित है।
इसमें कहा गया है कि प्रगति रिपोर्ट राजनीतिक आकाओं और सरकारी अधिकारियों के साथ साझा किए जाने संबंधी जानकारी सुप्रीम कोर्ट से छिपाने की कोई मंशा नहीं थी। यह रिपोर्ट किसी के साथ भी साझा नहीं करने संबंधी वक्तव्य रावल ने खुद ही दिया था।
किसने देखी रिपोर्ट और कराए बदलाव
कानून मंत्री अश्वनी कुमार, अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती, पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल हरेन रावल, पीएमओ में संयुक्त सचिव शत्रुघ्न सिंह और कोयला मंत्रालय में संयुक्त सचिव एके भल्ला।
अश्वनी कुमार का सफेद झूठ
सीबीआई के हलफनामे से कानून मंत्री अश्वनी कुमार के उस दावे की पोल खुल गई, जिसमें उन्होंने कहा था कि रिपोर्ट में बदलाव कराने में वह शामिल नहीं थे।
हलफनामे के मुताबिक कानून मंत्री ने दो बार बैठक बुलाई और अपने चैंबर में 6 मार्च को ड्राफ्ट स्टेटस रिपोर्ट में उन्होंने कुछ बदलाव किए। यह बदलाव रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करने से दो दिन पहले किए गए।
वाहनवती की भी खुली पोल
अटॉर्नी जनरल वाहनवती का झूठ भी पकड़ा गया। वाहनवती ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उन्होंने स्टेटस रिपोर्ट नहीं देखी है, जबकि सीबीआई ने कहा कि वाहनवती ने न केवल रिपोर्ट देखी थीं, बल्कि उनमें कुछ बदलाव भी सुझाए थे।
लेकिन सरकार का बचाव भी किया
सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने हलफनामे में यह भी कहा कि बदलाव के बावजूद स्टेटस रिपोर्ट की मुख्य थीम में कोई परिवर्तन नहीं आया और न ही इसमें किसी संदिग्ध के खिलाफ किसी सुबूत को मुताबिक को हटाया गया।
रिपोर्ट साझा करने के कोई नियम नहीं
सीबीआई निदेशक ने हलफनामे में कहा है कि सीबीआई मैन्युअल में इसका कोई जिक्र नहीं है कि अदालत में विचाराधीन मामले की स्टेटस रिपोर्ट किसी के साथ साझा की जा सकती है या नहीं। शीर्ष अदालत ने पूछा था कि किस नियम के तहत मंत्रियों और अधिकारियों को रिपोर्ट दिखाई गई।
कब कब हुई बैठकें:
--फरवरी के पहले सप्ताह में कानून मंत्री के चैंबर में, स्टेटस रिपोर्ट तैयार करने पर हुई चर्चा।
--28 फरवरी और 4 मार्च को तैयार स्टेटस रिपोर्ट को एएसजी हरेन रावल ने देखा।
--6 मार्च को सीबीआई निदेशक को कानून मंत्री ने स्टेटस रिपोर्ट देखने के लिए बुलाया।
--6 मार्च को ही रिपोर्ट वाहनवती को दिखाई गई, वहां हरेन रावल भी मौजूद थे।
--पीएमओ और कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने भी देखी रिपोर्ट।