भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली के लिए भले ही कम बजट आवंटन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा हो। लेकिन बजट खर्च करने में राज्यों की नाकामी सरकारी अस्पतालों की खस्ता हालत और सुविधाओं की किल्लत के लिए बड़ी वजह बन रही है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में 2012 में आवंटित बजट का 84 फीसदी तो 2013 तक मात्र 65 फीसदी ही खर्च किया गया। खर्च में कंजूसी का नतीजा यह हुआ कि 2013 से 2014 के बीच बिना डॉक्टरों के ही चल रहे सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 1072 से बढ़कर एकदम दोगुनी 2,225 हो गई।
यूपी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 3092 विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत है लेकिन सिर्फ 492 ही उपलब्ध हैं। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और बिहार में भी बुरी हालत है।