उत्तर प्रदेश में भाजपा संगठन की कमान किसी पिछड़े वर्ग के नेता को ही देगी। करीब दर्जन भर नामों पर अरसे से जारी मंथन के बाद पार्टी ने पिछड़ी जाति वर्ग के विधायक धर्मपाल सिंह के नाम पर दांव लगाने का संकेत दिया है।
हालांकि विचार विमर्श के अंतिम दौर में एक अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़े नेता स्वतंत्र देव सिंह के नाम पर भी मंथन जारी है। आंवला के विधायक धर्मपाल लोध बिरादरी से आते हैं तो स्वतंत्र देव कुर्मी बिरादरी से।
धर्मपाल को गृह मंत्री राजनाथ सिंह का करीबी माना जाता है। पार्टी सूबे का विधानसभा चुनाव किसी चेहरे को सामने रख कर लड़ने का भी मन बना रही है।
ब्राह्मण नेता बन कता है चुनावी चेहरा
माना जा रहा है कि इस क्रम में पार्टी किसी ब्राह्मण नेता को चुनावी चेहरा
बना सकती है। अध्यक्ष पद की घोषणा जल्द किए जाने की उम्मीद है, जबकि
मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए मंथन का सिलसिला अभी लंबा चलेगा।
लोकसभा
चुनाव में सूबे की 71 सीटों पर कब्जा करने वाली भाजपा का शीर्ष नेतृत्व
बीते 4 महीने से नया अध्यक्ष तय करने पर मंथन कर रहा था। शुरुआती दौर में
इस बात पर मंथन हुआ कि पिछड़ी, दलित या ब्राह्मण में से किस बिरादरी को
संगठन की कमान दी जाए।
इस क्रम में केशव मौर्या, मानव संसाधन राज्य मंत्री
राम शंकर कठेरिया, पर्यटन राज्य मंत्री महेश शर्मा, पार्टी उपाध्यक्ष दिनेश
शर्मा, कपड़ा राज्य मंत्री संतोष गंगवार, सांसद वरुण गांधी, धर्मपाल सिंह
और स्वतंत्र देव के अलावा कुछ अन्य नामों पर विचार विमर्श का दौर चला।
अंत
में किसी पिछड़ी जाति से जुड़े नेता को संगठन की कमान देने पर सहमति बनी।
राज्य संगठन से जुड़े एक नेता के मुताबिक फिलहाल इस पद की दौर में धर्मपाल
और स्वतंत्र देव ही बचे हैं। इनमें फिलहाल धर्मपाल का पलड़ा भारी है। इनमें
से धर्मपाल 5 बार विधायक रह चुके हैं और उनकी छवि निर्विवाद है। जबकि
स्वतंत्र देव एक बार एमएलसी रह चुके हैं।