एक तरफ दुनिया भर में विश्व महिला दिवस मनाया गया और दूसरी तरफ दिल्ली में फिर से एक युवती गैंग रेप की शिकार बनी। लगातार बढ़ते रेप के मामलों से केवल समाज ही नहीं सरकार भी हिल चुकी है।
इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि महिलाओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए जाएं ताकि विपत्ति के समय महिलाएं अपनी रक्षा कर पाएं।
यही नहीं लड़कियों की सुरक्षा को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने राज्यों के शिक्षा विभाग को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि स्कूलों में लड़कियों के लिए सेल्फ डिफेंस की शिक्षा दी जाए और उनकी किताबों में जेंडर के मुद्दे को लेकर पाठों की फिर से समीक्षा की जाए।
दूसरी तरफ सरकारी कोशिशों, सेमिनार, बहस, आंदोलन, डिजायन फॉर चेंज, बिरहा गीतों के बोल के जरिए महिला हिंसा के खिलाफ चेतना पैदा करने की कोशिश जारी है।
दिल्ली में महिलाओं के अधिकारों पर आयोजित सेमिनारों से इतर कुछ और प्रयास हुए हैं जिनसे महिलाओं के सम्मान में जागरुकता बढ़ी है। इसी सिलसिले में दिल्ली में 450 छोटे-बड़े कलाकार जमा हुए और एक वॉल बुक बना डाली -' डिजायन फॉर चेंज।'
एक किलोमीटर लंबी दीवार पर रंगों की भाषा में कलाकारों ने महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा पर लोगों की चेतना को जगाने का संदेश दिया।
ऐसे प्रयास केवल राजधानी में ही नहीं बल्कि बंगलूरू, अहमदाबाद और पुणे में भी हुए हैं। एक साल पहले मुंबई में वॉंट्रो मोशन इंडिया कंपनी ने मुंबई में कलाकारों ने भी इसी तरह महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के प्रति जागरुकता फैलाने का प्रयास किया था।
दिल्ली में चलती बस में गैंग रेप की घटना के बाद गीतकार जोखन मधुकर के बिरहा गीतों के जरिए लोगों ने इस दर्द को महसूस किया-" ‘एइसे बहिनिया के इज्जत लुटाई त कइसे कलइया में राखी बंधाई।’" गैंग रेप से पीड़ित एक लड़की की व्यथा को गीत के जरिए पेश कर गीतकार ने समाज को जागरुक करने वाला संदेश दिया।
इसके बाद करीब एक दर्जन बिरहा गायक दिल्ली गैंगरेप की हृदय विदारक घटना को अपने-अपने तरीके से लोगों के बीच लेकर गए। गायक अमृत लाल यादव का एलबम ‘दिल्ली बस गैंगरेप कांड (श्रद्धांजलि)’ और धर्मराज का ‘दिल्ली दामिनी कांड’ के नाम से आया और जिस तेजी से एलबम की बिक्री हुई, वह चौंकाने वाला था।
इन बिरहा गीतों को को लोकप्रियता तो मिली ही साथ ही साथ इनके जरिए औरतों के सम्मान और सुरक्षा का मुद्दा भी लोगों के दिलो दिमाग तक पहुंचा।