दिल्ली गैंगरेप का मुख्य आरोपी राम सिंह तिहाड़ जेल में 'सुसाइड वाच' पर रखा गया था। उसकी निगरानी के लिए जेल में गार्ड भी तैनात था। तिहाड़ जेल नंबर 3 में उसके साथ दूसरे कैदी भी रखे गए थे।
हालांकि इनमें से किसी को भी राम सिंह के फांसी लगाने का पता नहीं चल पाया। घटना के बाद तिहाड़ प्रशासन के रवैये और व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जेल सूत्रों के मुताबिक, राम सिंह फांसी लगाने से पहले सभी को चकमा देने में कामयाब रहा। जब उसने फांसी लगाई, तब उसकी सेल के बाहर तैनात सिपाही को भनक तक नहीं लग पाई।
जेल सूत्रों ने बताया कि उसके साथ बंद दूसरे कैदी भी घटना के वक्त सोते रहे और उन्हें पता नहीं लग पाया कि राम सिंह फांसी लगा रहा है। अब जेल प्रशासन ने इस मामले की मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट से जांच कराने के आदेश दिए हैं।
जनवरी से सभी थे सुसाइड वाच पर
दिल्ली गैंगरेप के मुख्य आरोपी राम सिंह समेत सभी पांचों आरोपियों को जनवरी से ही सुसाइड वाच पर रखा गया था। दरअसल जनवरी में गैंगरेप मामले की सुनवाई शुरु होने के बाद सभी आरोपियों को ये लगने लगा था कि उन्हें फांसी दे दी जाएगी।
इसके बाद ये गुमसुम रहने लगे थे और एक दूसरे से बात करना भी बंद कर दिया था। इसके बाद प्रशासन ने इनकी निगरानी शुरू कर दी थी और इन्हें सुसाइड वॉच पर रख दिया था।
राम सिंह ने मांगी थी फांसी
16 दिसंबर को चलती बस में पैरामेडिकल छात्रा से गैंग रेप करने के आरोप में पुलिस ने राम सिंह को सबसे पहले गिरफ्तार किया था।
उसके बयानों के बाद ही मामले के अन्य अरोपियों को पकड़ा जा सका था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल करते हुए राम सिंह ने कहा था, 'मुझे फांसी दे दी जाए।'
गौरतलब है कि राम सिंह ने सोमवार तड़के तिहाड़ जेल में फांसी लगा ली।