मेरठ में खरखौदा की युवती का धर्मांतरण कराने के बाद उसे शहर के मेरठ रोड स्थित मदरसे में एक दिन रखे जाने की पुष्टि हो गई है। खुद एसएसपी एचएन सिंह ने यह सच स्वीकार किया है। इसी मदरसे से दूसरी जगह ले जाने के दौरान ही युवती भागने में कामयाब हुई। युवती यहां से सीधे अपने घर पहुंची और पूरे मामले का खुलासा किया। यह सच सामने आने के बाद मदरसे की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।
मेरठ के खरखौदा निवासी युवती का धर्मांतरण कराकर उसे बंधक बनाकर रखे जाने के तार शहर से जुड़ गए हैं। अब तक पूरे मामले में स्थानीय स्तर की मिलीभगत को नकार रही पुलिस की जांच में यह साफ हुआ है कि पीड़ित युवती को एक दिन के लिए मेरठ रोड स्थित कॉलोनी के आवासीय मदरसे में रखा गया था।
बातचीत में एसएसपी ने स्वीकारा कि शनिवार को पीड़ित युवती को उक्त मदरसे में लाया गया था। एक दिन यहां रखने के बाद रविवार सुबह उसे अन्य जगह ले जाने की तैयारी थी, लेकिन पीड़िता यहां से निकलने में कामयाब हो गई और मेरठ के खरखौदा थाने पहुंचकर पूरे मामले का खुलासा किया था।
पुलिस आगे की कार्रवाई के लिए तैयार
एसएसपी ने बताया कि इसके बाद शाम करीब छह बजे इस मदरसे पर पुलिस जांच के लिए पहुंची थी। उस समय मदरसे के रजिस्टर को कब्जे में लेकर पुलिस लौट आई थी। देर रात तक डीएम आवास पर पूरे मामले को लेकर अफसरों की मीटिंग चलती रही। इसके बाद से पुलिस गुपचुप तरीके से जांच में जुटी हुई थी। जांच में पीड़ित युवती को एक दिन के लिए मदरसे में लाए जाने की पुष्टि होने के बाद मदरसा प्रबंधन जांच के दायरे में आ गया है।
अब तक पूरे मामले में चुप्पी साधे रही पुलिस आगे की कार्रवाई के लिए आला अफसरों की हरी झंडी का इंतजार कर रही है।
एसएसपी एचएन सिंह ने बताया कि पूरे मामले से मेरठ पुलिस को अवगत करा दिया गया है। मामले की रिपोर्ट मेरठ में दर्ज होने और विवेचना भी वहीं से किए जाने के चलते आला अफसरों के निर्देश पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सनाउल्ला ने छका रखा है पुलिस को
खरखौदा प्रकरण के मास्टर माइंड सनाउल्ला ने 42 पुलिस वालों को छका रखा है। पुलिस की सात टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए लगी हैं, मगर वह अभी तक हाथ नहीं आया। उसकी लोकेशन तो मिलती है, मगर पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह ठिकाना बदल देता है।
खरखौदा क्षेत्र की युवती के अपहरण से लेकर गैंगरेप और फिर जबरन धर्म परिवर्तन कराने में सनाउल्ला की भूमिका प्रमुख रही। पीड़िता के पिता ने एफआईआर में नवाब प्रधान, मौलाना सनाउल्ला, निशात, सनाउल्ला की पत्नी शमरजहां और हापुड़ निवासी हाफिज जी को नामजद किया था, जबकि चार अज्ञात बताए थे। पुलिस नवाब प्रधान, निशात और शमरजहां के अलावा गढ़मुक्तेश्वर से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, मगर सनाउल्ला को पकड़ना पाना पुलिस के लिए चुनौती बन हुआ है।
बुधवार रात में पुलिस ने दिल्ली, हापुड़, गुड़गांव समेत कई स्थानों पर दबिश दी। दिल्ली में सनाउल्ला की रिश्तेदारी बताई गई है, जबकि हापुड़ में काफी समय से आना जाना रहा। इन स्थानों पर दबिश में कहीं से भी सनाउल्ला की गिरफ्तारी नहीं होने पर बृहस्पतिवार सुबह टीमें लौट आई। छह-छह सदस्यों की सात पुलिस टीमों की कछुआ चाल से सनाउल्ला काफी तेज है, क्योंकि उसकी लोकेशन मिलने पर जब तक पुलिस पहुंचती है, वह फरार हो जाता है। हालांकि पुलिस अधिकारी दावा कर रहे हैं कि सनाउल्ला जल्द ही पुलिस गिरफ्त में होगा।
हापुड़ के हाफिज को लेकर असमंजस
पीड़िता के पिता ने एफआईआर में सनाउल्ला के साथ ही हापुड़ मदरसे के हाफिज को भी नामजद किया। पुलिस ने हापुड़ के हाफिज के बारे में जानकारी कराई। पुलिस मान रही है कि सनाउल्ला ही हापुड़ मदरसे का हाफिज है। सवाल उठ रहा है कि एफआईआर में नामजद हापुड़ के हाफिज को बचाने की साजिश तो शुरू नहीं हो गई है।
दो रिश्तेदारों के यहां दबिश
सनाउल्ला के दो रिश्तेदार हापुड़ के सिकंदरगेट चौकी क्षेत्र में रहते हैं। पुलिस को उनके नाम की जानकारी हुई, जिसके बाद एक टीम दबिश देने गई। वहां कुछ लोगों से दोनों के नाम बताकर खोजबीन कराई, तो पुलिस को बताया गया कि दोनों रिश्तेदारों का एक दशक पूर्व इंतकाल हो गया है।
सनाउल्ला के अलावा एक और मुख्य आरोपी
युवती से गैंगरेप और धर्मांतरण के सनसनीखेज मामले का पुलिस 48 घंटे में खुलासा कर सकती है। आईजी जोन ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि इस केस में सनाउल्ला के अलावा भी एक मुख्य आरोपी है। जिनकी गिरफ्तारी के लिए सात टीमें लगी हैं। युवती द्वारा दर्ज कराई रिपोर्ट और कोर्ट में दिए गए धारा 164 के बयान के आधार पर ही पुलिस कार्रवाई करेगी।
खरखौदा थाना क्षेत्र निवासी इस युवती ने विगत तीन अगस्त को उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन कराने का केस थाना खरखौदा पर दर्ज कराया था। जिसमें चार आरोपी नामजद हुए थे। जबकि चार अज्ञात बताए गए थे।
मदरसा संचालक के बयान से खडे हुए सवाल
मेरठ रोड स्थित मदरसा संचालक ने युवती के मदरसे में आने की बात स्वीकारी है। इससे सवाल खड़ा हो गया है कि युवती मदरसे में किसके साथ आई थी। मदरसा संचालक अकरम के बयान के बाद पुलिस-प्रशासन की मुश्किलें भी बढ़ती दिख रही हैं।
संचालक का कहना था कि युवती नौकरी मांगने आई थी और रात्रि में ठहरने के लिए अपनी मजबूरी बताई थी। सवाल यह भी है कि शहर में इतनी धर्मशाला हैं, ऐसे में इसी मदरसे में वह क्यों गई। मदरसे में नौकरी मांगने का सवाल भी अटपटा है। यह मदरसा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की आधुनिकीकरण योजना में शामिल नहीं है। पीडिता गणित की टीचर है, इसलिए मदरसे में उसे सरकारी योजना में शामिल नहीं किया जा सकता।
आवासीय नहीं है मदरसा
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी विजय मिश्रा का कहना है कि मदरसे की मान्यता पांचवीं तक की है। छात्रावास के रूप में मदरसे की मान्यता नहीं है। मदरसे में 15 वर्ष से ऊपर की 200 से अधिक छात्राएं धार्मिक शिक्षा ले रही हैं। मदरसा संचालक कहते हैं कि छात्राएं प्रतिदिन अपने घर पर चली जाती हैं। शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राएं आसपास के गांवों की हैं। उधर, मदरसा संचालक मोहम्मद अकरम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने पूरे दिन मोबाइल बंद किए रखा।
वर्चस्व जमाने के लिए मामूली विवाद को दे देता था तूल
गैंगरेप और धर्म परिवर्तन का आरोपी नवाब प्रधान गांव की राजनीति में वर्चस्व कायम करने में जुटा था। धार्मिक स्थल के निर्माण से जुड़ा विवाद, तो कभी रास्ते की चौड़ाई का मामला। हर मामले में नवाब प्रधान अपना दबदबा बनाता रहा।
ग्रामीणों की मानें तो दो साल पूर्व गांव में धार्मिक स्थल का विवाद गरमाया। एक पक्ष निर्माण करा रहा था, जबकि दूसरा पक्ष विरोध में था। नवाब प्रधान खुले तौर पर एक पक्ष के समर्थन में उतर आया और दूसरे पक्ष का जमकर विरोध किया था। इसकी वजह से तनातनी भी बन गई थी। हालांकि गांव के जिम्मेदार लोगों के दखल से बवाल टल गया था।
इसके अलावा गांव का एक व्यक्ति अपना मकान निर्माण करा रहा था, तो कुछ हिस्सा सड़क की तरफ आने पर उसका विरोध हुआ। नवाब प्रधान कुछ लोगों के साथ खुलकर विरोध में खड़ा हुआ और निर्माण रुकवा दिया था। ये दोनों मामले सिर्फ पीड़ित युवती के आसपास के इलाके से जुड़े हैं, जबकि अन्य भी कई घटनाक्रम हुए जब नवाब प्रधान और उसके ग्रुप के लोगों ने मनमानी की। वहीं, प्रधान पक्ष के लोगों का कहना है कि तीन दशक में पहली बार यहां मुस्लिम प्रधान चुना गया था।
'गहनता से जांच करे पुलिस'
फुलत गांव के एक मदरसे के उप प्रबंधक हाफिज इदरीश का कहना है कि कथित बंधक युवती और खरखौदा प्रकरण का उनके मदरसे से किसी तरह का ताल्लुक नहीं है। पुलिस प्रशासन को मामले की गहनता से जांच करनी चाहिए, अगर कोई दोषी पाया जाए तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन बिना तथ्यों के किसी को बदनाम करना उचित नहीं है।
अब्दुल्ला नहीं जबी से हुई पूछताछ
फुलत गांव से पूछताछ के लिए हिरासत में लिए गए युवक के नाम को लेकर भी गफलत की स्थिति रही। पुलिस को पहले युवक का नाम अब्दुल्ला पता चला था, लेकिन पूछताछ के बाद स्पष्ट हुआ कि हिरासत में लिए गए युवक का नाम जबीउर्रहमान है, वह गांव के एक मदरसे में पढ़ाता है। पुलिस ने उसे पूछताछ के बाद छोड़ दिया।
मौलवी को थाने ले जाने पर आक्रोश
बुधवार देर रात फुलत मदरसे के मौलवी जबीउर्रहमान को रतनपुरी पुलिस द्वारा थाने ले जाए जाने पर लोगों में आक्रोश है। हाजी सरवर, डॉ. मंसूर अल हक, काजी जमील अहमद, काजी नईम, हाजी वसीम, सभासद कारी जियाउर्रहमान, हाजी यूसुफ, ग्राम प्रधान अनवर अंसारी और हाफिज इदरीश ने इस संबंध में एसपी देहात से मिलकर नाराजगी जताई।
अब तो आयोग ने भी माना, हुआ था दुष्कर्म
मेडिकल रिपोर्ट में खुद युवती ने जानकारी दी थी कि उसके साथ गैंगरेप के बाद धर्मांतरण हुआ। इन आरोपों में केस भी दर्ज हुआ। लेकिन लखनऊ में बैठे अफसरों ने दुष्कर्म के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। अब बृहस्पतिवार को राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष जरीना उस्मानी ने पीड़िता के गांव पहुंचकर स्वीकार किया कि युवती के साथ दुष्कर्म और धर्मांतरण दोनों ही हुए हैं।
दरअसल, खरखौदा थाना क्षेत्र की युवती से धर्म परिवर्तन और गैंगरेप के मामले में लखनऊ के अफसरों के रुख ने सबको चौंका दिया था। सोमवार को एडीजी और मंगलवार को आईजी कानून व्यवस्था दोनों ने युवती से रेप की बात को नकार दिया था। जबकि डीआईजी रेंज रेप की बात को स्वीकार कर चुके थे। इसका मेडिकल आधार भी गलत नहीं था।
बृहस्पतिवार को आयोग अध्यक्ष खरखौदा पहुंचीं तो उन्होंने वार्ता के दौरान स्पष्ट कहा कि यह सच है कि युवती के साथ बलात्कार भी हुआ और धर्म परिवर्तन भी। और तो और मामले की सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दाखिल करने की भी बात कही गई।
'चार माह से भटक रही हूं, मुझे भी इंसाफ दिला दो'
बुलंदशहर की गैंगरेप पीड़िता चार माह से पुलिस अफसरों के चक्कर काट रही है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। पीड़िता बृहस्पतिवार दोपहर खरखौदा की गैंगरेप पीड़िता के गांव पहुंची और ग्रामीणों से इंसाफ दिलाने की गुहार लगाई।
बुलंदशहर का दंपति छह माह से लोहियानगर में किराए पर रहता था। आरोप है कि चार महीने पहले हापुड़ के एक बैंक मैनेजर समेत तीन लोगों ने उसके साथ गैंगरेप किया था। इसकी रिपोर्ट महिला ने बाबूगढ़ थाने में दर्ज कराई थी। महिला का कहना है कि चार महीने से मेरठ डीआईजी और आईजी के चक्कर काट रही है लेकिन आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हुई।
आरोपी पीड़ित परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहे है। बृहस्पतिवार महिला अपने पति, देवर को लेकर चर्चित गैंगरेप, धर्म परिवर्तन की पीड़िता के खरखौदा के गांव में पहुंची। पीड़िता ने ग्रामीणों से गुहार लगाई कि उनको भी इंसाफ दिला दो। आरोपी खुलेआम घूमकर जान से मारने की धमकी दे रहे है। पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, बल्कि एक दरोगा रिश्वत मांग रहा है। ग्रामीणों ने आश्वासन दिया कि वह भी उनकी बिटिया है। पुलिस अधिकारियों ने इस मामले की शिकायत की जाएगी। महिला का कहना है कि कार्रवाई न होने पर आत्मदाह कर लेगी। इसके बाद पुलिस ने हापुड़ पुलिस से फोन पर बात कर कार्रवाई करने का कहा।