लंबे वक्त तक गृह युद्ध की मार झेलने वाले श्रीलंका ने लंबा सफर तय किया है। रविवार शाम से शुरू हुआ जश्न जारी है। हो भी क्यों न। आखिरकार लंकाई टीम ने करीब 18 साल बाद आईसीसी का कोई बड़ा टूर्नामेंट अपने नाम किया है।
टी20 वर्ल्ड कप में एक भी मैच न हारने वाली टीम इंडिया दनदनाती हुई फाइनल में पहुंची, लेकिन श्रीलंका ने उसका ख्वाब तोड़ दिया। महेला जयवर्धने और कुमारा संगकारा को रिटायरमेंट का तोहफा मिला और इससे बेहतर विदाई की उम्मीद उन्होंने नहीं की होगी। इस बीच श्रीलंका के राष्ट्रपति ने भारत के प्रधानमंत्री को शुक्रिया कहा है।
क्या वजह है थैंक्यू की?
भारत और श्रीलंका यूं तो क्रिकेट के मैदान में नियमित तौर पर भिड़ते रहते हैं। इससे पहले उनके बीच 2011 के वर्ल्ड कप खिताबी मुकाबला हुआ था और उस दिन बाजी टीम इंडिया के हाथ लगी थी।
लेकिन रविवार का दिन श्रीलंका का था। सो जीत उसकी हुई। तमाम कोशिशों के बावजूद भारत की उम्मीदें बिखर गईं। क्रिकेट के मैदान से अलहदा दोनों देशों के बीच रिश्तों में उठापटक भी होती रहती है। कभी सौहार्द्र दिखता है, तो कभी तल्खी। इस बीच श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने अगर मनमोहन सिंह को शुक्रिया कहा, तो वजह जानने में दिलचस्पी होना स्वाभाविक है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर श्रीलंका का साथ
भारत ने कुछ दिन पहले घरेलू राजनीतिक दबाव को धता बताते हुए संकेत दिया था कि वो सार्वजनिक तौर पर श्रीलंका की आलोचना नहीं करेगा। भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की अहम वोटिंग से भी खुद को अलग रखा। भारत ने दोस्ती निभाई।
श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने इसके लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अब शुक्रिया भेजा है। भारत के वोटिंग से अलग रहने के कदम की वजह से पड़ोसी मुल्क के साथ उसके बेहतर रिश्तों की राह फिर खुल गई है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि इससे उन्हें अल्पसंख्यक तमिलों को राजनीतिक रूप से ज्यादा अहमियत देने का दबाव बनाने का मौका मिलेगा।
मछुआरे किए गए रिहा
श्रीलंका ने भारत की इस दोस्ती का जवाब भी दिया। समंदर में भटककर लंकाई सीमा में पहुंचे सभी भारतीय मछुआरों को रिहा कर दिया गया। जाहिर है, यह दोस्ती निभाने पर मिली सौगात है।
भारत ने भले श्रीलंका के साथ रिश्ते सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा दिया है। लेकिन अब उसकी जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। तमिल नेशनल अलायंस के साथ सत्ता हस्तांतरण की बातचीत दोबारा शुरू करने को लेकर दबाव बनाना होगा, ताकि राजपक्षे इस दिशा में संजीदगी से कदम उठा सकें।