देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के 125वें जन्मदिन पर जाने माने वैज्ञानिक और शिक्षाविद प्रोफेसर यश पाल ने नेहरू से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं।
यह आजादी के तुरंत बाद का कोई समय था, रात के करीब एक बजे इंडिया गेट के टेलीफोन बूथ से एक 15-16 साल का लड़का अपने बड़े भाई के देर रात घर नहीं पहुंचने पर बदहवासी में फोन करता है।
दूसरी ओर से आवाज आती है! किससे बात करनी है। लड़का कहता है मुझे प्रधानमंत्री से बात करनी है। दूसरी ओर से जवाब आता है, हां मै जवाहर लाल बोल रहा हूं, कहो क्या बात है! ऐसा था वो वक्त और ऐसे थे उस दौर के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू।
वो खोया हुआ भाई मैं था और फोन करने वाला लड़का मेरा छोटा भाई था। हुआ दरअसल यूं था कि मैं पंडित नेहरू का लेक्चर सुनने गया था। मुझे घर पहुंचने में देरी हो गई और मां चिंतित हो गईं। उस वक्त देश में दंगे चल रहे थे। घर पर सिर्फ छोटा भाई था।
मां ने उसे मुझे ढूंढने को भेज दिया। मेरे छोटे भाई को इतनी रात कुछ सूझ नहीं रहा था। वह बदहवासी में इंडिया गेट पहुंचा। वहां टेलीफोन बूथ था। उसके भोले दिमाग में एक बात आई कि मेरा बड़ा भाई प्रधानमंत्री की सभा में गया है, चलो प्रधानमंत्री को ही फोन करके पूछ लेता हूं।
डायरेक्ट्री देखकर उसने प्रधानमंत्री के ही यहां फोन कर दिया और उधर से नेहरू जी ने फोन उठाया। छोटे भाई ने उन्हें सारी बात बताई। पंडित नेहरू ने कहा कि भीड़ बहुत थी बस मिलने में देरी हो गई होगी, घर पहुंच जाएगा और अगर नहीं पहुंचे तो तुम सीधे मेरे पास आना और मैं यहां से किसी को तुम्हारे साथ भेजूंगा।
पंडित नेहरू में इतनी सरलता और सहजता थी। बहुत सी यादें जुड़ी हैं उनके साथ! यादों की चरखी अब खुलती जा रही है...
(विकास त्रिपाठी से बातचीत पर आधारित)