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सपा सांसद डिंपल यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत

Sat, 02 Feb 2013 07:36 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी व समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। सर्वोच्च अदालत ने डिंपल को निर्विरोध चुने जाने की साजिश रचने के कथित आरोप की सीबीआई से जांच कराने से इंकार कर दिया है। हालांकि शीर्षस्थ अदालत ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को याचिकाकर्ताओं को मिली धमकियों की जांच करके सुरक्षा उपलब्ध कराने को कहा है।
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उच्चतम न्यायालय ने भरत गांधी व प्रभात पांडेय की याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता सुरक्षा मुहैया कराए जाने का आवेदन डीजीपी के समक्ष करें। धमकियां मिलने के उनके आवेदन की जांच डीजीपी करें और जरूरत होने पर सुरक्षा मुहैया कराएं।

जस्टिस चंद्रमौली के प्रसाद की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि याचिका में की गई मांगों पर अदालत आदेश नहीं जारी कर रही है लेकिन यह छूट प्रदान की जा रही है कि याचिकाकर्ता सुरक्षा मुहैया कराए जाने के लिए डीजीपी के पास जा सकते हैं। पीठ ने कहा कि हमारी ओर से इस मामले में याचिकाकर्ता के दावों पर कोई राय नहीं दी गई है। डीजीपी को उनके आवेदन पर कानून के मुताबिक निर्णय लेना है।
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याद रहे कि याचिका में आरोप लगाया गया था कि डिंपल को निर्विरोध जीत दिलाने के लिए प्रभात पांडेय सहित अन्य उम्मीदवारों को नामांकन पत्र ही नहीं भरने दिया गया। उनका अपहरण कर एक कमरे में बंद कर दिया गया। याचिका में इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई थी जिस पर अदालत ने कोई भी आदेश जारी करने से इंकार कर दिया।

सर्वोच्च अदालत ने वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के मुखिया भरत और उनकी पार्टी के सदस्य प्रभात को सुरक्षा मुहैया कराए जाने का निर्णय डीजीपी पर छोड़ दिया है। याचिका में कहा गया था कि प्रभात गत वर्ष 5 जून को वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल (वीपीआई) के उम्मीदवार के तौर पर नामांकन कराने के लिए जिला मजिस्ट्रेट, कन्नौज के कार्यालय पहुंचे, जहां उसके पर्चे को बिना कारण स्पष्ट किए रिटर्निंग अधिकारी ने अस्वीकार कर दिया।

मुख्य चुनाव आयुक्त को इस संबंध में सूचना दी गई। उसके बाद शाम को सपा नेता नवाब सिंह यादव का फोन वीपीआई अध्यक्ष गांधी के पास आया, जिसमें पांडेय को चुनाव न लड़ने की धमकी दी गई। हालांकि पांडेय ने अपना नामांकन पत्र फैक्स के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त को फैक्स किया। इसके बाद जब पांडेय रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय पहुंचा तो वहां पहले से मौजूद कुछ लोगों ने गन प्वाइंट पर उसका अपहरण कर लिया गया था।

गौरतलब है कि याचिका में आरोप लगाया गया है कि पांडेय ने अपहरण के बाद खुद को एक कमरे में पाया। जहां पहले से ही कई लोग बैठे थे जो इस चुनाव में नामांकन कराना चाहते थे और उनका अपहरण कर कमरे में बंद कर दिया गया। अगले दिन 6 जून को दोपहर तीन बजे सभी को छोड़ दिया गया। लेकिन तब तक नामांकन पत्र भरने का समय समाप्त हो चुका था।
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