अब इसे सीबीआई के चाबुक का डर कहें या फिर मौकापरस्त सियासत का उदाहरण। नरेंद्र मोदी के धुर विरोधी सपा और बसपा दोनों में एनडीए सरकार के संकटमोचक की भूमिका निभाने की होड़ मच गई है।
प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र की नियुक्ति के संबंध में बसपा सुप्रीमो मायावती ने मोदी सरकार का समर्थन करने का ऐलान किया तो सपा भी इस मुद्दे पर तुरंत सरकार के साथ खड़ी हो गई। दोनों पार्टियों ने कांग्रेस का विरोध करना शुरू कर दिया है।
सपा और बसपा के रणनीतिकार मोदी सरकार से संबंध बेहतर बनाने के पक्षधर हैं। इसलिए संसद के अंदर वे सरकार से टकराव लेने के मूड में नहीं हैं।