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फोन टैपिंग मसला उठाने में भाजपा से आगे सपा

Wed, 27 Feb 2013 09:41 PM IST
नई दिल्ली/धीरज कनोजिया
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राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली की फोन टैपिंग का मसला उठाने में प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के बजाय सपा आगे दिख रही है। दरअसल, फोन टैपिंग के मसले पर सपा एक तीर से दो निशाने साधने की तैयारी में है।
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इस मसले पर जहां पार्टी को विपक्ष के नेताओं के फोन टैप करने का आरोप लगाकर यूपीए सरकार को घेरने का मौका मिल रहा है। दूसरी तरफ वह भाजपा की अंदरूनी कलह को उजागर करने की कोशिश में भी है।

सपा के शीर्ष नेताओं की मानें तो फोन टैपिंग का मसला भाजपा की अंदरूनी कलह का ही नतीजा है। इसलिए वह इसे संसद में उठाने से बच रही है। सपा के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि भाजपा के आपसी घमासान को सामने लाने के मकसद से भी पार्टी ने इस मसले को राज्यसभा में उठाया है।
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राज्यसभा में बुधवार सुबह प्रश्नकाल की शुरुआत में ही सपा के इस मसले को जोर शोर से उठाने को लेकर सियासी हलकों में हैरानी देखने को मिली। सपा नेता नरेश अग्रवाल ने यह मामला उठाते हुए गृह मंत्रालय से जांच की मांग की।

वहीं सदन से बाहर सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा कि गृह मंत्री को बताना चाहिए कि फोन टैप कराने के पीछे मास्टरमाइंड कौन है। यूपीए सरकार के खिलाफ जेटली का फोन टैपिंग का मुद्दा बड़ा माना जा रहा था। मगर भाजपा ने संसद के बजट सत्र में इसे उठाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।

सपा नेताओं का कहना है कि भाजपा अपनी अंदरूनी कलह को छिपाने के लिए इसे मुद्दे को तूल नहीं दे रही है। जबकि भाजपा के बड़े नेताओं को पता है कि पार्टी के कुछ नेता जेटली की फोन टैपिंग के पीछे हैं। इसलिए वे चुप हैं। सपा नेताओं का मानना है कि अगर सरकार जांच कराती है तो इसके पीछे का सच सामने आ सकता है।

भाजपा की अंदरूनी कलह भी उजागर हो सकती है। वहीं पार्टी इस मसले को जोर शोर से उठाकर यूपीए सरकार को भी घेरने के मूड में है। सपा ने सरकार पर विपक्षी दलों के नेताओं की फोन टैपिंग के जरिए जासूसी करने का आरोप लगाया है। इससे पहले सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव भी अपना फोन टैप किए जाने का मसला उठा चुके हैं।
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