फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राहुल से सोज ने पूछा, कैसे निकलें अफजल के फांसी के फंदे से

Sun, 17 Feb 2013 12:48 AM IST
नई दिल्ली/संजय मिश्र
विज्ञापन
विज्ञापन
संसद पर हमले के गुनहगार अफजल गुरू की फांसी को लेकर कांग्रेस और यूपीए सरकार भले ही वाहवाही लूट रही हो लेकिन जम्मू कश्मीर प्रदेश कांग्रेस के माथे पर शिकन इस मुद्दे को लेकर गहराती जा रही है।
विज्ञापन


अफजल के मुद्दे पर घाटी में चल रही इस सियासी गहमागहमी से परेशान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सैफुद्दीन सोज ने शनिवार को सीधे राहुल गांधी से ही सवाल कर डाला कि वह अफजल की फांसी को लेकर प्रदेश की जनता के कठिन सवालों का सामना आखिर कैसे करें। प्रदेश कांग्रेस का साफ कहना है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती का केंद्र सरकार पर लगातार हमले कांग्रेस की सियासी सेहत पर गहरा असर डाल रहा है।

लोकसभा चुनाव 2014 की तैयारियों से रूबरू होने के लिए शनिवार को बुलाई गई विधायक दल के नेताओं और प्रदेश अध्यक्षों की बैठक में सोज ने अफजल की फांसी प्रकरण से गरम घाटी की सियासत पर हाईकमान से यह सवाल किया।
विज्ञापन


सूत्रों के अनुसार सोज ने कहा कि अफजल की फांसी को अचानक अंजाम दिए जाने के मुद्दे को उमर अब्दुल्ला से लेकर महबूबा मुफ्ती जिस तरह सवाल उठा रहे हैं, वह कांग्रेस को कठघरे में खड़ा कर रहा है। सोज का इशारा साफ था कि फांसी के बाद घाटी में इसको लेकर जाहिर की जा रही प्रतिक्रिया में अपनी सियासत के लिहाज से उमर और महबूबा बयान दे रहे हैं। मगर कांग्रेस के लिए इस मामले पर चुप रहने के अलावा कोई जवाब नहीं है। सूत्रों के मुताबिक राहुल ने सोज की बातों को गंभीरता से तो सुना मगर तत्काल कोई राय जाहिर नहीं की।

गौरतलब है कि अलगाववादी हुर्रियत के नेता ही नहीं मुख्यमंत्री उमर और महबूबा ने अफजल को गुपचुप फांसी देने के केंद्र सरकार के रुख पर न केवल सवाल उठाए हैं बल्कि उमर ने तो अफजल के शव को उसके परिवार को सौंपने की मांग का भी समर्थन किया है। इसको लेकर घाटी की सियासत की संवेदनशीलता काफी गहराई हुई है।

इसके मद्देनजर ही प्रधानमंत्री ने फांसी देने में बरती गई अति गोपनीयता को लेकर गृह मंत्रालय से दो दिन पहले जवाब-तलब किया था। वैसे कांग्रेस ने फांसी के तत्काल बाद राष्ट्रीय स्तर पर सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए इसका पूरा श्रेय लिया था।

साथ ही आतंकवाद पर नरम होने के भाजपा के सियासी एजेंडे को भी कसाब के बाद अफजल की फांसी से ध्वस्त कर दिया था। मगर जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस की सियासी दुविधा यह है कि घाटी की सियासत के लिहाज से वह पार्टी के इस रुख को जाहिर नहीं कर पा रही। इसीलिए सोज ने राहुल से पूछा कि आखिर प्रदेश कांग्रेस इस दुविधा के संकट में क्या करे?
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें