जब राहुल गांधी ने बागी नेताओं से जुड़े अध्यादेश को फाड़कर फेंकने की बात कही, तो हड़कंप मच गया। लेकिन यह उनके बढ़ते वर्चस्व का संकेत भी था, जिसने प्रधानमंत्री के फैसले को बौना बना दिया।
कांग्रेस के 'एंग्री यंगमैन' राहुल गांधी अगर पार्टी की कमान अपने हाथों में लेते दिख रहे हैं, तो इसके पीछे वजह भी है। कांग्रेस लंबे वक्त से उन्हें सेनापति की भूमिका में देखना चाहती थी, लेकिन अगर अब वह खुद इसके लिए तैयार दिख रहे हैं, तो इसका कारण सोनिया गांधी हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी चाहती हैं कि 2016 में वह राजनीति से रिटायरमेंट लें, क्योंकि इस साल वह 70 बरस की हो जाएंगी। यह खुलासा एक किताब में हुआ है।
किदवई ने राज से हटाया पर्दा
सोनिया गांधी की बायोग्राफी लिखने वाले लेखक और वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई ने अपनी किताब '24, अकबर रोड' के नए संस्करण में इस राज से पर्दा हटाया है।
रशीद ने इस खुलासे की पुष्टि अमर उजाला से की और साथ ही अपनी किताब का वह अध्याय भी भेजा, जिसमें इस बात का उल्लेख किया गया है।
किदवई ने लिखा है, "राहुल गांधी को 19 जनवरी, 2013 में जयपुर चिंतन शिविर में कांग्रेस उपाध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन उनके लिए बड़ी भूमिका की पटकथा 9 दिसंबर 2012 को लिख दी गई थी, जब सोनिया 67 साल की हुईं।"
घोषणा से कांग्रेस स्तब्ध
उन्होंने लिखा है, "पार्टी अध्यक्ष ने ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के अधिकारियों को बताया कि वह 70 साल की उम्र में सक्रिय राजनीति से रिटायर होने की योजना बना रही हैं। इस घोषणा से स्तब्ध पार्टी नेताओं ने राहुल से जिम्मा संभालने के लिए कहा।"
किदवई के मुताबिक इसके बाद 42 वर्षीय राहुल को मनाने की कोशिश शुरू हुई, लेकिन तब वह नहीं मान रहे थे। यहां तक कि प्रधानमंत्री सिंह ने भी राहुल को कैबिनेट में शामिल होने का ऑफर फिर दोहराया।
इस किताब में लिखा है, "बाहरी दुनिया के लिए प्रधानमंत्री हमेशा सोनिया और राहुल गांधी के सामने सिफर हैं, लेकिन हकीकत में वे उन्हें काफी सम्मान देते हैं। उनके ज्ञान और अनुभव को मानते हैं। उनके फैसलों का आदर करते हैं।"