कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का इस्तीफा फिलहाल स्वीकार नहीं किया है। पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों का मानना है कि पार्टी हाईकमान हार के तुरंत बाद कांग्रेस शासित राज्यों में अफरातफरी मचाने के पक्ष में नहीं है।
मगर देर सबेर पार्टी हाईकमान नेतृत्व परिवर्तन को अनिवार्य मान रहा है। इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष सबसे बारी बारी मुलाकात कर स्थितियों का जायजा ले रही हैं।
वीरभद्र और गोगोई को मिली राहत
बृहस्पतिवार को गोगोई के अलावा हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सोनिया गांधी को हिमाचल प्रदेश में करारी हार को लेकर अपनी सफाई दी। मगर मुलाकात के बाद उन्होंने फिर से इस्तीफे से इनकार किया।
उनका कहना है कि न उनसे इस्तीफा मांगा गया और न ही उन्होंने दिया। सोनिया ने बृहस्पतिवार को गोगोई का इस्तीफा नहीं स्वीकारते हुए संकेत दे दिए हैं कि हाईकमान करारी हार के बाद पार्टी में फिलहाल हड़कंप मचाने के हक में नहीं है।
अभी खतरा टला नहीं
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि इस समय अगर एक मुख्यमंत्री का इस्तीफा भी मंजूर किया जाता है तो बाकी उन कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों का भी इस्तीफा लेना पड़ेगा, जिनका चुनाव में प्रदर्शन खराब रहा है।
इसलिए पार्टी हाईकमान सभी स्थितियों का जायजा लेने के बाद ही मुख्यमंत्रियों को कुर्सी से हटाने के बारे में अंतिम फैसला लेगा। मगर पार्टी के एक पक्ष का कहना है कि अगर राज्यों के नेतृत्व परिवर्तन नहीं किया जाएगा तो इन राज्यों में चुनाव में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा सकता है।
बुरे प्रदर्शन पर गिरेगी तलवार
सूत्रों ने बताया कि नेतृत्व ने स्थितियों की समीक्षा कर रहा है। असम में कांग्रेस के बागी विधायकों ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से समय मांगा है। माना जा रहा कि बागी विधायकों से मिलने के बाद ही राज्य की सियासी परिस्थितियों को देखते हुए अंतिम फैसला लिया जाएगा।
दूसरी तरफ हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव तक कुर्सी पर बनाए रखने के हाईकमान के पक्ष में नहीं है। मगर वीरभद्र के बागी तेवरों को देखते हुए पार्टी कोई सशक्त विकल्प तैयार करने के बाद वहां अंतिम फैसला लेने की कोशिश में है।
हार की होगी पूरी समीक्षा
उधर, 16 मई के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा भी कांग्रेस अध्यक्ष से मिल चुके हैं। हुड्डा के लिए ये राहत की बात है कि उनका बेटा रोहतक से लोकसभा चुनाव जीतने में कामयाब रहा।
जबकि हिमाचल में वीरभद्र की पत्नी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत की पत्नी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी पार्टी के अंदर निशाने पर है। वह भी पार्टी अध्यक्ष से मुलाकात कर सफाई दे सकते हैं।