पिछले कुछ समय से लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज के निशाने पर रहने वाली कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया मंगलवार को ‘गांधीगिरि’ करती नजर आईं।
हमलों और नाराजगी को पीछे छोड़ कर वह आगे बढ़ीं और सुषमा स्वराज के कंधे पर आत्मीय अंदाज में हाथ रखा। उनका हाल जाना और गिले-शिकवे दूर करने की कोशिश की।
वैसे राजनीति के जानकारों के अनुसार सोनिया की यह पहल उनकी इस चिंता से उपजी है कि संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण खत्म होने में मात्र तीन दिन बचे है और उनका महत्वाकांक्षी खाद्य सुरक्षा बिल अभी तक लटका हुआ है।
जनता को खाद्य सुरक्षा की गारंटी अगले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का एक मुख्य हथियार होगा। कांग्रेस 10 मई को खत्म हो रहे इसी सत्र में भूमि अधिग्रहण बिल भी पास कराना चाहती है। जो भाजपा के सहयोग के बगैर संभव नहीं दिखता। दोनों नेताओं की मुलाकात दस मिनट तक चली।
दरअसल हुआ यूं कि हंगामे की वजह से लोकसभा के स्थगन के बाद वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के साथ सेंट्रल हॉल की ओर बढ़ रही सुषमा के ठीक पीछे सोनिया भी चल रही थीं। इसी दौरान सोनिया ने आगे बढ़ कर सुषमा के कंधे पर आत्मीय अंदाज में हाथ रखा।
अभिवादन के साथ दोनों नेताओं के बीच बातचीत शुरू हुई। बातचीत लंबी खिंचती देख दो मिनट बाद आडवाणी आगे बढ़ गए। तब सोनिया-सुषमा के बीच अकेले में बातचीत शुरू हुई।
दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत पर भाजपाई चुपी हैं, लेकिन सूत्रों ने बताया कि मुलाकात में एक-दूसरे का हालचाल जानने के बाद संसद में जारी गतिरोध पर बातचीत शुरू हो गई। सोनिया ने भाजपा की सरकार से नाराजगी का जिक्र करते हुए पूछा कि इस स्थिति में गतिरोध कैसे दूर हो सकता है।
इस पर सुषमा ने कहा कि भाजपा ने आसन और संसदीय कार्यमंत्री की बैठकों के बहिष्कार की बात कही है, प्रधानमंत्री या नेता सदन की बैठकों का नहीं। उन्होंने इशारों में ही सोनिया को प्रधानमंत्री या नेता सदन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के सर्वदलीय बैठक बुलाने की सलाह दी।
बातचीत के दौरान सुषमा ने साफ कर दिया कि पार्टी संसदीय कार्यमंत्री के साथ लोकसभा अध्यक्ष की बुलाई बैठकों का बहिष्कार जारी रखेगी। सुषमा ने इस मुलाकात की पुष्टि करते हुए स्वीकार किया कि इस दौरान बेहद आत्मीयता भरे माहौल में बातचीत हुई।
नया नहीं सोनिया का यह अंदाज
विपक्ष के नाराज नेताओं को मनाने का सोनिया का यह अंदाज नहीं है। वह पहले भी ऐसा कर चुकी हैं। इसी सत्र के पहले चरण में उन्होंने तब सबको चौंका दिया था जब वह लोकसभा में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव तक खुद पहुंची थीं।
उन्होंने हाथ जोड़ कर मुलायम से कहा था कि वह इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के इस्तीफे की मांग त्याग दें। सोनिया की पहल पर मुलायम नरम पड़ गए थे। बेनी ने मुलायम पर सांप्रदायिक ताकतों से हाथ मिलाने सरकार को बाहर से समर्थन देने के बदले धन लेने का कथित आरोप लगाया था।
‘तीन मिनट में 60 बार टोका’
सुषमा स्वराज पिछले हफ्ते यह कहते हुए नाराज हो गई थीं कि उन्हें लोकसभा में बोलने से रोकने के लिए सोनिया गांधी ने अपनी पार्टी के नेताओं और मंत्रियों को उकसाया था।
उन्होंने कहा था कि मेरे तीन मिनट के भाषण में कांग्रेसियों ने 60 बात टोकाटाकी की थी। जवाब में कांग्रेसी भी भड़के थे और अगले दिन उन्होंने सुषमा के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया था।
निकलेगा बीच का रास्ता...?
सूत्रों का कहना है कि सोनिया-सुषमा मुलाकात के बाद संसद का कामकाज चलाने के लिए कोई बीच का रास्ता निकल सकता है।
खबर है कि भाजपा ने वरिष्ठ नेता अनंत कुमार को सरकार से समझौता वार्ता के लिए नियुक्त किया है। जबकि सरकार की ओर से कृषि मंत्री शरद पवार बात कर रहे हैं। संभावना है कि प्रधानमंत्री सर्व दलीय बैठक बुला सकते हैं, लेकिन यह तभी होगा जब भाजपा उसमें आने को तैयार होगी।