सोशल मीडिया के कारण मध्यप्रदेश में भड़क रहा हैं सांप्रदायिक तनाव? ये सवाल इसलिए क्योंकि पिछले दिनों प्रदेश में सांप्रदायिक हिंसा की जो वारदातें सामने आई हैं उनमें से अधिकतर में सोशल मीडिया की भूमिका रही।
अंग्रेजी अखबार TOI के मुताबिक धार और खंडवा में सांप्रदायिक हिंसा की जो वारदातें रहीं उनमें व्हाट्सएप्प और फेसबुक की भूमिका सामने आई है।
सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर आपत्तिजनक पोस्ट डालने के बाद हिंसा भड़की और ऐसा एक दो बार नहीं बल्कि 42 बार हुआ। जनवरी से लेकर 15 सितंबर के बीच 24 जिलों में ये 42 वारदातें हुईं।
हाल ही में एक ऐसा मामला भोपाल के तलैया से भी सामने आया था जहां ईद के दौरान तनाव पैदा करने का प्रयास किया गया। पुलिस इस मामले में फिलहाल जांच कर रही है।
39 लोगों को किया गया गिरफ्तार
इन 42 घटनाओं में से 14 घटनाएं इंदौर जोन में हुईं, जबलपुर जोन में 12, भोपाल में एक, उज्जैन में सात, ग्वालियर, शहडोल और बालाघाट में दो-दो और होशंगाबाद जोन में एक वारदात हुई। 39 लागों को आईपीसी और आईटी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया।
एडीजी (साइबर सेल) अशोक दोहरे ने बताया कि ऐसे मामलों में स्थानीय पुलिस केस दर्ज करती है और साइबर सेल उनकी सहायता करता है। साइबर सेल ये बताता है कि कोई मैसेज या पोस्ट कहां से और कब चला था।
पूर्व डीजीपी नंदन दुबे ने कुछ महीनों पहले सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाकर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने वालों पर कार्रवाई का निर्देश दिया था।
कब कब हुई सांप्रदायिक हिंसा की वारदातें
30 जुलाई को खंडवा में एक कत्ल के बाद सांप्रदायिक तनाव फैल गया। पता चला कि इसके पीछे सोशल नेटवर्किंग साइट पर डाली गई पोस्ट हैं। हालात इतने बिगड़े कि इलाके में कर्फ्यू लगाना पड़ा।
25 जून को मंडला जिला इसलिए हिंसा की चपेट में आ गया कि क्योंकि किसी ने भारतीय झंडे के अपमान की तस्वीरें और शेर पर पाकिस्तानी झंडे की तस्वीरें शेयर की थीं।
12 अगस्त में शहडोल में आपत्तिजनक सामग्री सोशल साइटों पर डालने से सांप्रदायिक तवान फैल गया। लोग सड़कों पर निकल आए और जमकर बवाल हुआ।