पेरिस में आतंकी संगठन आईएसआईएस द्वारा पूरे तालमेल के साथ किए गए हमले और मुंबई के 26/11 हमले में बड़ी समानता देखी जा रही है। 2008 के मुंबई हमले की तरह पेरिस हमले में भी आतंकवादियों ने कम संसाधनों में ज्यादा नुकसान पहुंचाने की नीति अपनाई है। भारत सहित अमेरिका के सुरक्षा विशेषज्ञ भी इस बात से इत्तफाक रखते हैं।
आतंकवाद के विशेषज्ञों के मुताबिक एके-47 और ग्रेनेड के साथ फिदाइन युवकों का हमला इन संगठनों के लिए कम संसाधनों में ज्यादा नुकसान पहुंचाने का तरीका है। सुरक्षा बल की कार्रवाई में फिदाइन लड़ाकों का मारा जाना इन संगठनों के लिए बड़ी बात नहीं है। पूर्व रॉ प्रमुख ए एस दुल्लत के मुताबिक इस हमले में लक्ष्य और हमले की जगह पहले से ही बड़ी बारीकी से तय किया गया है। मुंबई हमले की ही तरह हमलावरों के बीच आपसी तालमेल भी देखा जा रहा है। दुल्लत ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि इस घटना से साफ हो गया है कि अमेरिका और उसके साझेदारों की आतंक के खिलाफ लड़ाई कमजोर पड़ गई है।
पूर्व आईपीएस अधिकारी व महाराष्ट्र के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रहे पीके जैन ने बताया कि आम तौर पर आतंकवादी संगठन प्रत्येक हमले के लिए नया तरीका ईजाद करते हैं। एक बार आतंकी हमला होने के बाद उस तरीके से निपटने के लिए पुलिस सतर्क हो जाती है इसलिए तरीका बदलता रहता है। मुंबई में हुए 26/11 के कई साल बाद पेरिस में भी उसी तरह का हमला हुआ है इसलिए इसमें समानता देखी जा रही है।