एक महिला की जासूसी मामले पर नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस व भाजपा में जुबानी जंग तेज हो गई है।
चुनावों की घड़ी में कांग्रेस इस मुद्दे को छोड़ना नहीं चाहती है। इसी के चलते गुजरात सरकार की ओर से गठित दो सदस्यीय आयोग पर कांग्रेस को विश्वास नहीं है।
कांग्रेस ने कहा है कि इस आयोग को बनाने का मकसद ही मोदी को क्लीन चिट देना है और वे भी अगले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले। ताकि मोदी इसका राजनीतिक फायदा उठा सकें और कांग्रेस पर निशाना साध सकें।
कांग्रेस ने आयोग गठन के कदम को लीपापोती बताया है। पार्टी सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश के तहत ही जांच की पैरवी कर रही है।
दूसरी तरफ मोदी के समर्थन में उतरी भाजपा ने कांग्रेस पर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस मामले को तूल देने का आरोप लगाया है।
पार्टी के पूर्व अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने इसे कांग्रेस की ओछी हरकत करार दिया है। उन्होंने कहा कि चुनावी माहौल में कांग्रेस महंगाई, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के मामले उछाल रही है।
दूसरी तरफ कांग्रेस ने भाजपा और मोदी कर हमले तेज कर दिए हैं। गुजरात सरकार ने राज्य पुलिस की ओर से 2009 में एक महिला आर्किटेक्ट की जासूसी के मामले में एक सेवानिवृत्त महिला न्यायाधीश की अध्यक्षता में दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी है।
मोदी सरकार के इस कदम के बाद कांग्रेस अब एक कदम आगे बढ़कर हमला कर रही है। मंगलवार को उसने कह दिया कि गुजरात सरकार कई विपक्षी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं और पत्रकारों तथा कई प्रतिष्ठित लोगों के फोन टेप कर रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता पी सी चाको ने कहा कि गुजरात सरकार तानाशाह की तरह काम कर रही है। लोगों की निजता पर हमला किया जा रहा है।
वहीं, राष्ट्रीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष शोभा ओझा कहती है कि इस आयोग पर विश्वास नहीं है। गुजरात सरकार इतनी ही पाक साफ है तो उसे सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान जज के तहत जांच करानी चाहिए।