केंद्र की नई सरकार गुजरात में आर्किटैक्ट युवती की कथित जासूसी मामले की जांच बंद कराने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि जांच बंद कराने के लिए गृह मंत्रालय जल्द ही कैबिनेट की बैठक में नोट पेश करेगा। इस नोट के माध्यम से मंत्रालय पिछली सरकार के जांच कराने के फैसले को रद्द करने का प्रस्ताव रखेगा।
पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की कैबिनेट ने इस कांड की जांच के लिए न्यायिक आयोग गठित करने का फैसला किया था।
यूपीए सरकार युवती की जासूसी के साथ ही हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, राज्यसभा में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष और वर्तमान वित्त मंत्री अरुण जेटली के फोन टेप के मामले की भी जांच इसी आयोग के तहत कराने की इच्छुक थी।
मामले में उठा था राजनीतिक बवंडर
हालांकि इस मामले में राजनीतिक बवंडर खड़ा होने के साथ खुद सरकार और कांग्रेस में मतभेद के सुर बुलंद होने के कारण इस मामले में जांच की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई। दरअसल विवाद ने इसलिए भी तूल पकड़ा क्योंकि कांग्रेस युवती की जासूसी कराने का आरोप गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर मढ़ा था। तब भाजपा ने सरकार के जांच कराने के इस फैसले का तीखा विरोध किया था।
गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार कैबिनेट की बैठक में जल्द ही जांच बंद कराने केलिए मंत्रालय एक नोट पेश करेगा। गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही इस मामले को राजनीति से प्रेरित बता चुके हैं।
भाजपा का तर्क है कि जब गुजरात सरकार पहले ही इस मामले की जांच का आदेश दे चुकी है, तब केंद्र सरकार का यह निर्णय भाजपा के प्रति दुर्भावना को प्रदर्शित करता है।
यूपीए ने लिया था जांच कराने का फैसला
उल्लेखनीय है कि इस मामले की जांच के सवाल पर पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के कार्यकाल के अंतिम दौर में सियासी हड़कंप मच गया था। कैबिनेट ने गत 26 दिसंबर को इस मामले की जांच के लिए न्यायिक आयोग गठित करने को मंजूरी तो दे दी थी।
इसके तहत मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश से कराने की बात की गई थी। मगर शुरू में कोई सेवानिवृत्त जज इसके लिए तैयार नहीं हुआ।
बाद में तत्कालीन कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने चुनाव के दौरान जज तलाशने और जांच शुरू कराने की कोशिश तो की, मगर इसके बाद खुद सरकार और कांग्रेस में इस मामले को लेकर मतभेद सामने आ गए थे। हालांकि न्यायिक जांच आयोग के गठन से पूर्व कांग्रेस ने इस मामले में मोदी पर खुल कर आरोप लगाए थे।
क्या है मामला
एक वेबपोर्टल ने ऑडियो टेप सार्वजनिक करते हुए गुजरात के स्नूपगेट मामले का खुलासा किया था।
इसमें दावा किया गया था गुजरात की सरकार ने सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर वर्ष 2009 में एक आर्किटैक्ट युवती की कथित तौर पर जासूसी कराई थी।