फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिवसेना ने कहा, 'सुधींद्र कुलकर्णी पाकिस्तान का एजेंट'

विज्ञापन
विज्ञापन
शिवसेना पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी की किताब के विरोध पर अड़ी हुई है। पार्टी के प्रवक्ता संजय राउत ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर उन अफवाहों को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि शिवसेना ने कसूरी की किताब पर अपना विरोध वापस ले लिया है।
विज्ञापन


राउत ने भाजपा के पितृपुरुष लालकृष्ण आडवाणी के करीबी सुधींद्र कुलकर्णी पर फेंकी गई स्याही को भी जायज ठहराया। उन्होंने सुधींद्र कुलकर्णी को पाकिस्तान का एजेंट और कसूरी को कश्मीरी अलगाववादियों का मददगार बताया।

कसूरी पर हमला करते हुए राउत ने कहा कि यह वही कसूरी हैं, जिसने जम्मू कश्मीर के अलगाववादी नेताओं और भारत विरोधी ताकतों को भारत के खिलाफ लड़ने के लिए उनकी मदद करता था। भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले लोगों को इस देश में बुलाकर उनके किताब का विमोचन किया जा रहा है जो राष्ट्रवाद के खिलाफ है।
विज्ञापन


उल्लेखनीय है कि कुलकर्णी के ऊपर स्याही फेंकने के बाद चारों तरफ हो रही निंदा के बाद यह खबरें सामने आई थीं कि शिवसेना ने अपना विरोध वापस ले लिया है। इस पर शिवसेना ने कहा कि हम सबको यह साफ साफ बता देना चाहते हैं कि हमने अपना विरोध वापस नहीं लिया। हम अभी भी अपने फैसले पर कायम हैं और आगे भी रहेंगे।

सीएम को लिखा पत्र

राउत से जब पूछा गया कि अगर विरोध ही करना था तो फिर कुलकर्णी पर हमला क्यों किया गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यह हमला नहीं था, यह एक गैर हिंसक विरोध था। शिवसेना ने कहा कि वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस के उस बयान का स्वागत करते हैं जिसमें उन्होंने कहा कि वह कार्यक्रम के दौरान ऐसे किसी बात को बर्दास्त नहीं करेंगे जिससे देश की गरिमा को चोट पहुंचे और भारत की छवि खराब हो।

हालांकि, शिवसेना ने इस कार्यक्रम को रद्द करने के लिए मुख्यमंत्री को एक पत्र भी लिखा है। उन्होंने अपने विरोध के बारे विषय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस को भी अवगत करा दिया है और उनसे मांग की है कि इस कार्यक्रम को रद्द किया जाए। राउत ने कहा कि हम जानते हैं कि अगर मुख्यमंत्री खुद से इस कार्यक्रम को रद्द कर देंगे के तो उनकी छवि धूमिल होगी। इसलिए हमने पत्र लिखकर उनकी यह दुविधा भी खत्म कर दी।

हो रही है आलोचना

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी की किताब का विमोचन मुंबई में आयोजित करने वाले सुधींद्र कुलकर्णी पर शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने स्याही तो फेंक दी लेकिन अब इस घटना की चौतरफा निंदा हो रही है। शिवसेना ने अपने कार्यकर्ताओं की इस हरकत का बचाव करते हुए सही ठहराया है।

वैसे तो किसी नेता पर स्याही फेंकें जाने की घटना तो अक्सर देखने और सुनने को मिलती है लेकिन ऐसा बहुत ही कम होता है कि कोई नेता इस तरह की घटनाओं की आलोचना करता है। कुलकर्णी पर स्याही फेंके जाने की घटना के बाद कई लोगों ने इसकी भर्त्सना की है। आइए जानते हैं किसने क्या कहा?

किसने क्या कहा?

भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने कुलकर्णी पर स्याही फेंके जाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा, 'हाल के दिनों में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं। ये घटनाएं लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं। कम से कम हमारे साथ जितने लोग जुड़े हैं वे इस प्रकार की हिंसा की प्रवृति को पूरी तरह से अस्वीकार करें।'

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू, 'विरोध संविधान और कानून के दायरे में होना चाहिए लेकिन किसी को शारीरिक क्षति नहीं पहुंचाई जानी चाहिए।'

आम आदमी पार्टी, 'देवेंद्र फडणवीस सरकार पर हमला बोला और कहा कि सरकार राज्य में कानून और व्यवस्था बहाल करने में नाकाम रही है। आप ने आरोप लगाया कि मुंबई में 'सांस्कृतिक चरमपंथ' का शासन है।'

शिव सेना सांसद संजय राउत, 'हमने पहले ही कसूरी की पुस्तक प्रकाशन का विरोध किया था। पाकिस्तान लगातार भारत विरोधी गतिविधियां करता है, और कुछ लोग बजाय इसके कि इसका विरोध करें, पाकिस्तानी कलाकार तथा राजकीय नेताओं के कार्यक्रम आयोजित करते है। हम यह कभी बर्दाश्त नहीं कर सकते।'


विज्ञापन

'यह विरोध नहीं था'

गौरतलब है कि सोमवार की सुबह सुधींद्र कुलकर्णी के घर के सामने कुछ अज्ञात लोगों ने कुलकर्णी पर स्याही फेंकी थी। कुलकर्णी ने बयान में कहा था कि वे शिवसेना के कार्यकर्ता थे।

उन पर स्याही फेंके जाने की भर्त्सना करते हुए खुर्शीद महमूद कसूरी ने कहा, 'विरोध करना लोगों का मौलिक अधिकार है। लेकिन जो कुलकर्णी के साथ हुआ वो विरोध नहीं है।' उन्होंने ये भी कहा कि दुनिया के सारे देशों की नींव सकारात्मक सोच पर टिकी है और हमें सकारात्मक सोच की ही जरूरत है।

फिलहाल भारतीय दंड संहिता की धारा 341, 146, 147 और 148 149 के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। साथ ही पुस्तक के उद्घाटन स्थल नेहरु सेंटर की भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें