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यूपी: युवक ने गंगा में बहा दिए 16 लाख रुपए, पर क्यों?

Mon, 17 Nov 2014 03:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बहजोई (संभल)
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यूपी में संभल के बहजोई में अंधविश्वास में आकर एक युवक ने अपनी नौ बीघा जमीन बेच दी और साधु के वेश में आए ठगों के कहने पर सोलह लाख रुपये गंगा में बहा दिए। काफी इंतजार के बाद भी साधु वेशधारी के न लौटने पर युवक को खुद के ठगे जाने का एहसास हुआ तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। पीड़ित युवक ने पुलिस को तहरीर देकर मदद की गुहार लगाई है।
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बहजोई के गांव बिसारू निवासी जितेंद्र पुत्र सोमपाल सिंह ने बताया कि करीब चार माह पूर्व एक युवक गांव में आया और पत्नी चंद्रवती से बोला कि तुम्हारे घर में धन गड़ा हुआ है। इसी माया के कारण तुम्हारे ससुर की जान गई है और अब तुम्हारे पति की बारी है। पूरा परिवार नष्ट हो जाएगा। वह अपने गुरु के माध्यम से माया निकलवाने की बात कहकर चला गया। जितेंद्र के मुताबिक करीब दो दिन बाद वह युवक बाइक पर सवार होकर गांव आया। उसके साथ एक साधु वेशधारी समेत दो लोग थे। साधु वेशधारी युवक ने अपना नाम ओमप्रकाश बताया। बाद में साधु ने पूजा-अर्चना कर कमरे में पीतल के सात कलश दिखाए। इनमें से तीन में सोना, तीन में चांदी और शेष दो में सोना-चांदी दोनों होने की बात कहकर लौट गया।

कुछ दिन बाद साधु वेशधारी युवक ने उसे फोन कर राजघाट स्थित गंगा तट पर बुलाया। वह पत्नी के साथ पहुंचा तो वहां साधु वेशधारी ने हवन-पूजन किया। फिर कुछ दिन बाद गंगा तट पर रुपये लेकर अकेले पहुंचने की बात कही। इस पर जितेंद्र ने गांव की जमीन बेचकर सात लाख रुपये लिए और गंगा तट पर पहुंच गया। साधु वेशधारी पहले से ही वहां मौजूद था। उसने हवन-पूजन कर पॉलीथिन में रखे रुपये गंगा में प्रवाहित करने को कहा। जितेंद्र ने उसकी बात मानते हुए रुपयों से भरी थैली गंगा में प्रवाहित कर दी और गांव लौट आया। इसके बाद साधु वेशधारी ने एक-एक कर गजरौला स्थित गढ़-मुक्तेश्वर की गंगा, हरिद्वार की गंगा तथा मुरादाबाद की रामगंगा में रुपये प्रवाहित कराए। जितेंद्र ने साधु वेशधारी की बात मानते हुए कुल 16 लाख रुपये गंगा में प्रवाहित कर दिए।
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बरेली से दिलवाया था मोबाइल फोन

जितेंद्र ने बताया कि 31 अक्तूबर, 2014 को साधु वेशधारी ने उसे फोन पर बरेली पहुंचने को कहा। वह बरेली पहुंचा तो साधु वेशधारी ने उससे मोबाइल फोन दिलाने की बात कही। इस पर उसने साधु वेशधारी को मोबाइल फोन दिलवाया।

कार्तिक पूर्णिमा पर न पहुंचने पर हुआ ठगी का शक
साधु वेशधारी ने कार्तिक पूर्णिमा पर आने की बात कही और कहा कि इस दिन तुम्हारी जानलेवा माया चली जाएगी और शुद्ध धन-दौलत के रूप में सही माया तुम्हें मिल जाएगी। कार्तिक पूर्णिमा पर बहुत इंतजार किया, लेकिन साधु वेशधारी नहीं पहुंचा। इसके बाद उसे शक हुआ कि वह ठगी का शिकार हो गया है। रविवार को ग्रामीणों के साथ वह थाना पहुंचा और पुलिस को जानकारी दी।

चार बार में बेची थी नौ बीघा जमीन
जितेंद्र ने बताया कि साधु वेशधारी ने जब-जब गंगा में प्रवाहित करने के लिए रुपये मंगाए। उसने अपनी गांव की जमीन बेचकर दिए। उसने अपनी नौ बीघा जमीन चार बार में बेची थी।
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