मटका किंग सुरेश भगत हत्याकांड में मुंबई की एक सत्र अदालत ने शुक्रवार को उसकी पत्नी और बेटे समेत छह लोगों को दोषी करार दिया।
अभियोग पक्ष के अनुसार, मटका किंग सुरेश्ा भगत के जुए के 'साम्राज्य' और उसकी संपत्ति हथियाने के लिए बेटे हितेश और पत्नी जया ने उसकी हत्या कराई थी।
एक साजिश के तहत 13 जून 2008 को भगत समेत पांच लोगों की सड़क दुर्घटना में हत्या कर दी गई। एक ट्रक ने भगत की स्कॉपियो को टक्कर मारी थी। बाद में पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि जया और हितेश ने सुरेश की हत्या के लिए सुहास रोगे को सुपारी दी थी।
महाराष्ट्र पुलिस ने इस मामले में सुहास रोगे समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया, इन पर मकोका लगाया गया।
बाद में दो आरोपियों किरण पुजारी और शेख अजीमुद्दीन सरकारी गवाह बन गए। पुजारी ने अपने बयान में बताया कि वह भगत के घर पर जया से मिला था। उसने बताया कि जया को डर था कि सुरेश भगत जुए के सारे धंधे बंद करने वाला है। इस पर रोगे ने सुरेश भगत को ठिकाने लगाने की बात कही थी।
मुख्य सरकारी वकील कल्पना चव्हाण ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया था कि यह एक नृशंस हत्या थी। इस मामले में आरोपियों को दोषी साबित करने के लिए 80 गवाहों को पेश किया गया। सत्र न्यायाधीश एस जी सेटे ने छह आरोपियों को हत्या और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी माना।
बताया जाता है कि सुरेश भगत के जुए का धंधा काफी बड़ा था। वह इससे सालाना करोड़ों रुपए कमाता था।