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'चिदंबरम ने किया अर्थव्यवस्था का कबाड़ा'

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भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने देश की अर्थव्यवस्था को गर्त में ले जाने के लिए वित्त मंत्री पी चिदंबरम को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। पूर्व वित्त मंत्री सिन्हा ने चिदंबरम की नीतियों को कठघरे में खड़ा करते हुए उनसे 18 सवाल पूछे हैं।
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चिदंबरम ने एक दिन पहले ही दावा किया था कि राजग सरकार की तुलना में यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान अर्थव्यवस्था अधिक मजबूत हुई है। सिन्हा ने चिदंबरम के इस दावे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यूपीए सरकार के 10 साल के कार्यकाल में कुशासन के चलते आर्थिक विकास दर में जबरदस्त गिरावट आई है।

चिदंबरम को इतिहास में अर्थव्यवस्था का कबाड़ा करने वाले और विकास दर को पांच फीसदी से नीचे रखने में माहिर वित्त मंत्री के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार की नीतियां इतनी गलत और प्रतिकूल रही हैं कि यदि इन्हें सुधार दिया जाए तो 60 फीसदी काम तो इसी से हो जाएगा।
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चिदंबरम पर दागे 18 सवाल

उन्होंने कहा कि राजग के सत्ता छोड़ने से लेकर यूपीए के दूसरे कार्यकाल में बंटे सिलसिलेवार 18 सवालों में सिन्हा ने चिदंबरम से पूछा है कि मजबूत अर्थव्यवस्था विरासत में मिलने के बावजूद उन्होंने इसे पटरी से कैसे उतार दिया। उन्होंने कहा कि जब लगातार सात तिमाहियों में जीडीपी विकास दर 5 फीसदी से नीचे रही, तब चिदंबरम किस आधार पर अर्थव्यवस्था की मजबूती का दावा कर रहे हैं। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में तो जीडीपी दर 4.7 फीसदी ही थी।

रोजगार सृजन के मुद्दे पर नेशनल सैंपल सर्वे आर्गेनाइजेशन (एनएसएसओ) के सर्वे का हवाला देते हुए सिन्हा ने कहा कि 1999-2000 से 2004-2005 के बीच छह करोड़ से अधिक नौकरियों के अवसर बने, जबकि यूपीए सरकार के दस साल के कार्यकाल के बीच यह आंकड़ा महज 1.5 करोड़ ही रहा।

उन्होंने दावा किया कि यूपीए की पहली सरकार के दौरान शुरुआती चार साल तक ऊंची विकास दर दरअसल राजग सरकार के समय किए गए उपायों का नतीजा थी। उन्होंने कहा कि चिदंबरम ने 19 मार्च को जब इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की तो उसी दिन सेंसेक्स में 125 अंकों का उछाल देखा गया। इससे जाहिर है कि अर्थव्यवस्था भावना पर भी आधारित है।
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