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खुर्शीद ट्रस्ट: शिविर लगाए बिना ही सूची पर हस्ताक्षर

Sun, 21 Oct 2012 12:34 PM IST
सिद्धार्थनगर/ब्यूरो
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विकलांगों के जिन उपकरणों को लेकर केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद का डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट उलझा है, उसके तार उत्तर प्रदेश के जिले सिद्धार्थनगर से भी से जुड़े हैं। ट्रस्ट ने बाजार में दो साल पहले शिविर लगाकर 24 विकलांगों को ट्राई साइकिल, वाकर, बैसाखी आदि उपकरण देने का दावा किया है। जबकि अमर उजाला की पड़ताल में चार के ही नाम पते सही मिले हैं और उन्होंने भी उपकरण मिलने से इनकार किया है।
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हैरानी की बात है कि लाभार्थियों की सूची पर जिन अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं, वे शिविर लगने की बात से इनकार कर रहे हैं। सवाल है कि बिना शिविर लगे लाभार्थियों की सूची पर अफसरों ने हस्ताक्षर कैसे कर दिए? इस मामले में बीडीओ और तत्कालीन प्रभारी जिला विकलांग कल्याण अधिकारी से पूछताछ हो सकती है।

नाम गलत हैं या फिर पता
जिले में 24 ऐसे नाम हैं, जिन्हें उपकरण दिए जाने का दावा किया गया है। इस सूची में प्रथम दृष्टया कई नाम और उनके पते ही गड़बड़ हैं। इसमें दो नाम खेसरहा के ग्राम रमवापुर निवासी कन्यावती पुत्री रामशंकर व अली हसन पुत्र जुलामदार के हैं। इन लोगों को इस सूची में वाकर दिए जाने की बात है। जबकि उन्हें पांच माह पहले ट्राई साइकिल मिली थी। दो और नाम राकेश पुत्र राम किशन और संजय पुत्र चिथी के हैं। इनके नाम सही हैं पर गांव गलत है। इसमें सिर्फ संजय के पास एक ट्राई साइकिल है वह भी 2004 में मिली थी। इसी सूची में कई ऐसे हैं जिनके या तो नाम गलत हैं या फिर पता।
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हस्ताक्षर करके फंसे
निदेशक विकलांग कल्याण ने प्रदेश के 16 जिलों के विकलांग कल्याण अधिकारियों को 28 जून, 2011 को पत्र प्रेषित कर विकलांगों को उपकरण दिए जाने और लाभार्थियों की सूची पर उनके हस्ताक्षर के बारे में पूछा था। इसके बाद 15 सितंबर, 2011 को जो रिपोर्ट शासन को भेजी गई उसमें अफसरों ने हस्ताक्षर तो सही बताया पर उपकरण के वितरण से इनकार किया। एक बीडीओ जगत पाल कहते हैं कि हस्ताक्षर तो मेरे हैं लेकिन लगता है कि मुझसे गलत ढंग से करा लिया गया है। जहां तक कैंप लगने की बात है तो ब्लाक परिसर में कैंप नहीं लगा था।
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