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खोज: 60 सालों में मानसून में आया एक बड़ा बदलाव

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कुछ सालों से मानसून के मिजाज में बदलाव दिख रहा है। पहले बारिश के दिनों में लगातार लगी रहने वाली पानी की झड़ी अब कहीं गायब सी हो गई है। बादल आते हैं, बरसते हैं और फिर गायब हो जाते हैं।
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एक अध्ययन की मानें तो यह बदलाव एकाएक नहीं बल्कि पिछले 60 सालों में आया है। धीमी बारिश (स्लो पल्स) की तीव्रता यानी लगातार होने वाली बरसात 6 दशकों में कम हो गई है। कम समय तक होने वाली तेज बारिश (इक्स्ट्रीम इवेंट्स) ने इसकी जगह ले ली है।

इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस (आईआईएससी) द्वारा किए गए अध्ययन में मौसम के इस बदलाव के बारे में पता चला है। मुख्य अध्ययनकर्ता निरुपम करमारकर ने बताया कि परिणाम के लिए 1961 से लेकर 2013 तक के डाटा का अध्ययन किया गया है।
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अध्ययन में चला मानसून के बदले मिजाज का पता

इसके अनुसार तटीय क्षेत्रों में मई-जून तथा मध्य भारत में जुलाई और अगस्त में इक्स्ट्रीम इवेंट्स की घटना बढ़ी है। उन्होंने बताया कि पिछले अध्ययनों में भी यह वृद्धि दर्ज की गई थी पर हमें यह पता लगाना था कि इक्स्ट्रीम इवेंट्स मौसम के सक्रिय, विराम और संक्रमण काल में कैसे फैले हुए हैं।

बदलती जलवायु में मानसून में उप मौसमी परिवर्तन को भी अध्ययन में शामिल किया गया है। हालांकि मानव प्रेरित जलवायु परिवर्तन और जलवायु पर प्राकृतिक विविधता का असर अस्पष्ट है।

स्लो पल्स की तीव्रता कम होना मानसून के सक्रिय काल में इक्स्ट्रीम इवेंट्स के कम होने से जुड़ा हुआ है। करमारकर का पेपर एन्वायरनमेंट रिसर्च लेटर्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में स्लो पल्स और फास्टर पल्स को अलग किया गया है। स्लो पल्स मानसून में 20 से 60 दिनों तक रहती है।
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