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विपक्ष में बैठेगी शिवसेना, गठबंधन पर सस्पेंस कायम

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बरसों पुराने दोस्त अब महाराष्ट्र विधानसभा में एक-दूसरे के खिलाफ आवाज बुलंद करते दिखाई देंगे। भाजपा के साथ बढ़ती दूरियों के बीच शिवसेना ने विपक्ष में बैठने का फैसला कर लिया है।
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इसी प्रक्रिया के तहत उसने विधानसभा सचिव को पत्र लिखकर विपक्ष के नेता पद पर अपना दावा ठोक दिया है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए भाजपा और शिवसेना के फिर से एक होने की गुंजाइश लगभग खत्म हो चुकी है।

हालांकि इस बीच एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने बिन मांगे ही भाजपा को अपना समर्थन देने का ऐलान कर अपनी पावर गेम शुरू कर दी है।

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा, "अपने फैसले को लेकर हमने किसी से बात नहीं की। यह राज्य के हित को देखते लिए लिया गया फैसला है। किसी ने हमसे समर्थन नहीं मांगा है। भाजपा हमारा प्रस्ताव अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र है। वैसे सरकार चलाना एक कला है और अल्पमत में भी सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर सकती है।"
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एनसीपी ने बिन मांगे दिया समर्थन

शिवसेना प्रवक्ता नीलम गोरहे ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने पार्टी विधायक एकनाथ शिंदे को विपक्ष का नेता बनाने के संबंध में विधानसभा सचिव अनंत कलसे को पत्र लिखा है।

इस मुद्दे पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि कांग्रेस ने विपक्ष के नेता पद पर अपना दावा किया था। चूंकि सोमवार तक का ही वक्त था। इसलिए अगर भाजपा के साथ चर्चा के इंतजार में बैठे रहते तो हम न घर के होते न घाट के। इसलिए शिवसेना ने समय रहते विधानसभा सचिव अनंत कलसे को पत्र भेज दिया।

मंगलवार तक नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी। उसके बाद बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होने के बाद देवेंद्र फडणवीस सरकार को अपना बहुमत सिद्ध करना है।

इस बीच भाजपा सरकार में नंबर दो मंत्री एकनाथ खड़से ने एक बार फिर शिवसेना से कहा कि वह सभी कटुता भूलकर साथ आए जबकि शिवसेना ने स्पष्ट किया है कि एनसीपी के समर्थन को लेकर पहले रुख साफ किया जाए।
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पवार ने साधा शिवसेना पर निशाना

महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना में तू-तू-मैं-मैं के बीच पवार का पॉवर गेम शुरू हो गया है। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने शिवसेना पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कोई हमें यह सलाह न दे कि हम किसे समर्थन दें। चुनाव नतीजे आने के बाद हमसे किसी ने समर्थन नहीं मांगा फिर भी हमने अपना रुख स्पष्ट किया है।

पवार ने कहा कि जैसे हमने अपना रुख जाहिर किया है वैसे ही किसी को सलाह देने के बजाए शिवसेना को भी अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। भगवा आतंकवाद के मुद्दे पर भी पवार ने शिवसेना को करारा जवाब दिया।

उन्होंने माना कि मालेगांव बम धमाके के बाद हमने भगवा आतंकवाद की बात की थी, लेकिन जब वह राष्ट्रपति चुनाव में प्रणब मुखर्जी के लिए वोट मांगने उद्धव ठाकरे के घर मातोश्री गए थे, तब उन्हें भगवा आतंकवाद जैसे बयान की याद क्यों नहीं आई।

उन्होंने कहा, "मुखर्जी को वोट देकर शिवसेना भगवा आतंकवाद का साथ दे चुकी है तो अब इसका जिक्र क्यों?" पवार ने अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार को गिराने के आरोप पर कहा कि उस समय वह विपक्ष के नेता थे, इसलिए अपने कर्तव्य का निर्वाह किया। उसमें गलत क्या है।

क्या भ्रष्टाचार से बचने के लिए पवार भाजपा को समर्थन दे रहे हैं इस सवाल के जवाब में पवार ने कहा कि सरकार इसकी जांच कराए, जिससे सच्चाई सामने आ सके।
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