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रोटी विवाद: उद्धव ठाकरे ने दी चेतावनी

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नई दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में रोजा-रोटी विवाद पर शिवसेना ने महाराष्ट्र की कांग्रेस-एनसीपी सरकार पर निशाना साधा है।
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शिवसेना ने आरोप लगाया है कि यह विवाद महाराष्ट्र सरकार की ओर से प्रायोजित है, इसलिए महाराष्ट्र सदन के मुस्लिम मैनेजर को जबरन रोटी खिलाने की बात को योजनाबद्ध तरीके से तूल दिया गया है।

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने इस मामले में महाराष्ट्र सदन के आयुक्त बिपिन मलिक का निलंबन और सदन के निर्माण कार्य में हुई धांधली व ठेके  की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि सदन का उपयोग मराठी मानुष के लिए नहीं है तो इसमें लॉजिंग-बोर्डिंग शुरू कर देना चाहिए।
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'याद रखना, मुकाबला शिवसेना से है'

शिवसेना ने सामना में लेख के जरिए महाराष्ट्र सदन में सांसदों के कृत्य का समर्थन किया है। लेख में कहा गया है कि सांसद जो रबर की रोटी खा रहे थे वह मुख्यमंत्री, पीडब्लूडी मंत्री और सदन के आयुक्त को खिलाया जाता तो उन्हें महाराष्ट्र सदन में चल रही मनमानी का अंदाजा हो जाता।

महाराष्ट्र सदन में न पीने का पानी, न साफ सफाई और घटिया खाना जैसी सारी मुसीबतें नकद पैसे देकर लिया जाएगा तो संताप तो होगा ही, इसलिए सांसदों का गुस्सा भड़क उठा। लेकिन इस भड़की हुई चिनगारी को राजनीतिक और धार्मिक रंग देकर उसे दावानल का रूप देने की कोशिश महाराष्ट्र मंत्रालय से हो रही है।

उद्धव ने कहा कि सदन का कर्मचारी मुस्लिम है, क्या यह उसके कपाल पर लिखा था? फिर क्यों एक रोटी पर बेवजह इतना हंगामा बरपा है। शिवसेना ने चेतावनी देते हुए कहा है कि धार्मिक श्रद्धा का विषय व्यक्तिगत है, लेकिन उसका इस तरह व्यापारीकरण और राजनीतिकरण कर हमें बदनाम करने की कोशिश की जाएगी तो याद रखना मुकाबला शिवसेना से है।
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मोदी सरकार आज देगी बयान

महाराष्ट्र सदन में रोजेदार मुस्लिम कर्मचारी को शिवसेना सांसदों द्वारा जबरन रोटी खिलाने के मामले में सरकार शुक्रवार को संसद में बयान देगी। सरकार ने कहा है कि वह इस घटना की जानकारी इकट्ठा कर रही है।

यूपीए और वाम दलों के सदस्यों ने बृहस्पतिवार को भी इस घटना पर सरकार के बयान की मांग की। लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस घटना की जांच के लिए सांसदों की समिति गठित करने के लिए लोकसभा स्पीकर को लिखे गए पत्र का मामला उठाया।

उन्होंने स्पीकर से इस मामले में अपना निर्णय सुनाने की अपील की। राज्यसभा में भी कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों ने इस घटना पर सरकार के बयान की मांग करते हुए आरोपी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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