शिवसेना के एक नेता हैं अरविंद भोंसले। कुछ वक्त पहले तक ये इतना बड़ा नाम नहीं थे जितना आज हैं। शिवसेना ने अपने पुराने प्रवक्ताओं की जगह जो नए प्रवक्ता बनाए हैं उनमें एक नाम अरविंद का भी हैं। लेकिन अरविंद एक अलग वजह से भी चर्चाओं में हैं।
दरअसल 2005 में अरविंद ने एक कसम खाई थी। ऐसी कसम जिसको उन्होंने इतनी शिद्दत से निभाया कि वो मिसाल बन गई। अब कसम के पूरा होने के बाद उन पर शिवसेना आलाकमान समेत तमाम कार्यकर्ता मेहरबान हैं।
21 नवंबर 2005 को उन्होंने कसम खाई थी कि वे तब तक जूते चप्पल नहीं पहनेंगे जब तक कि नारायण राणे हार नहीं जाएंगे। नारायण शिवसेना छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे और तभी अरविंद ने ये कसम खाई थी।
हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में राणे को शिवसेना के वैभव नाइक ने पराजित किया। सिंधुदुर्ग को नारायण राणे का गढ़ माना जाता है। अरविंद यहां पर शिवसेना को मजबूत करने का काम कर रहे थे।