महाराष्ट्र में हाल के दिनों में शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी की दोस्ती में काफ़ी दरार आई है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ठाकरे परिवार ने पहली बार मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी जताई है।
बाल ठाकरे की मृत्यु के बाद पहली बार राज्य में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। इससे पहले जब मुंबई महानगर पालिका और लोकसभा के चुनाव हुए थे, तब शिवसेना काफी बिखरी हुई, टूटी हुई और हताश थी।
लेकिन फिर भी पार्टी ने चुनावों में सफ़लता हासिल की। ऐसे में, शिवसेना को लग रहा है कि अब राज्य में मुख्यमंत्री का पद उसे ही मिलना चाहिए, जबकि बाल ठाकरे हमेशा रिमोट कंट्रोल से सरकार चलाना चाहते थे।
शिवसेना पहली बार राजनीतिक तर्क का भी सहारा ले रही है। उद्धव ठाकरे ने एक साक्षात्कार में कहा है कि नरेंद्र मोदी की लहर तमिलनाडु, पंजाब, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में नहीं चली है, तो इसका क्या कारण था?
इसका जवाब भी उद्धव ने ख़ुद दिया है कि जिन राज्यों में नरेंद्र मोदी की पार्टी का गठबंधन नहीं था, वहां उसे हार का सामना करना पड़ा।