नरेंद्र मोदी सरकार के स्नूपगेट कांड की 'जांच' कराने का सुझाव देने के बाद देश के गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने यूटर्न लेते हुए साफ कर दिया है कि इस मामले की कोई जांच नहीं होगी।
शिंदे ने साफ किया कि यह मामला केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, इसलिए वह इस मामले की जांच नहीं कर सकती।
हालांकि, गृह मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में राज्य सरकार से रिपोर्ट जरूर मांगी जा सकती है, क्योंकि राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने एक महिला समूह की याचिका को मंत्रालय को भेजा है।
इससे पहले कहा जा रहा था कि युवती की जासूसी मामले की जांच कराने पर केंद्र गंभीरता से विचार कर रहा है। खुद गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे सहित गृह मंत्रालय के अति विशिष्ट सूत्रों ने इस आशय के संकेत दिए थे।
शिंदे ने इस संबंध में जानकारी इकट्ठा करने की बात स्वीकार करते हुए कहा है कि जांच का निर्णय केंद्र और राज्य के गृह सचिव करेंगे।
कोबरा पोस्ट और गुलेल ने बीते दिनो गुजरात के तत्कालीन गृह राज्य मंत्री अमित शाह पर अपने ‘साहेब’ के लिए बंगलूरू की एक आर्किटेक्ट युवती की जासूसी कराने का दावा किया था।
कांग्रेस का कहना था कि शाह के ‘साहेब’ दरअसल नरेंद्र मोदी थे। इसके साथ ही पार्टी ने कई मोर्चों से मोदी पर हमला बोलने के बाद इस मामले में राष्ट्रपति का भी दरवाजा खटखटाया था।
मामले के तूल पकड़ने के बाद गुजरात सरकार ने इस मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय आयोग का गठन कर दिया था। सूत्र की मानें तो मंत्रालय ने इस संबंध में कानूनी सलाह भी ले ली है।
पूरे मामले में मोदी का नाम सामने आने के बाद कांग्रेस इस मुद्दे का इस्तेमाल बड़े राजनीतिक हथियार के रूप में करना चाहती है। यही कारण है कि मामले के सामने आने के दिन से ही कांग्रेस इस मुद्दे पर भाजपा और मोदी पर लगातार हमला बोल रही है।
पार्टी ने इस मुद्दे पर महिला संगठनों को गोलबंद करने के साथ ही राष्ट्रपति से भी जासूसी कांड की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराए जाने की मांग की है। जबकि भाजपा लगातार कहती रही है कि युवती के पिता के आग्रह पर गुजरात सरकार ने युवती को सुरक्षा दी थी।
अन्य अपडेट, सच्ची और अच्छी खबरें पढ़ने के लिए आप हमें facebook पर ज्वॉइन करें