अदालत ने मानहानि के मामले में पेश न होने पर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने कहा कि चुनाव लड़ना सरकारी कामकाज नहीं है।
साकेत स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नम्रता अग्रवाल ने मुख्यमंत्री के न आने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मानहानि का यह मामला काफी अरसे से लटका पड़ा है।
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अदालत कई बार याची शीला दीक्षित को पेश न होने पर चेतावनी भी दे चुकी है। चुनाव लड़ना उनका व्यक्तिगत मामला है। यह सरकारी कामकाज नहीं है। अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी।
मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी।
शीला दीक्षित ने याचिका में आरोप लगाया था कि विजेंद्र गुप्ता ने एक समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में उन्हें विलेन व धोखेबाज कहा है।
अदालत में मुख्यमंत्री के वकील ने सीएम को पेशी से छूट देने का आग्रह करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री विधानसभा चुनाव में व्यस्त हैं।